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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 269 में से

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पृष्ठ 57

पंचमप्रकाशः ५. ( ५१ )

सपतिहियहारिगये । काहूनउठायोथलनछुडायोटरचोनटा-
रचोभीतभये ॥ इनराजकुमारनिअतिसुकुमारनिलैआयोहोंपै
जकरे ॥ व्रतभंगहमारोभयोतुम्हारोऋषितपतेजनजानिप-
रे ॥ ३९ ॥ विश्वामित्र-तोमर ॥ सुनिरामचन्द्रकुमार-
धनुआनियेयहिबार ॥ पुनिवेगताहिचढ़ाव ॥ यशलोकलोक
बढ़ाव ॥ ४० ॥
टी०-जनक कोमलपाणि कहेउ ताल ए मारीचादि को वध सुनाइ कठोर
पाणि जनायो ॥ ३८ ॥ असुर बाणासुरादि विनायक गणेश अथवा असुरनमें
विनायक श्रेष्ठबाणासुर औ राक्षस पति रावण पैज कहे धनुष उठाइबेमें
पराक्रम करिबेको लै आये हैं अथवा पैजकहे श्रमको करिकै तुम इन्हें ल्यायै हौ
अथवा पैज प्रतिज्ञा ॥ ३९ ॥ ४० ॥
मु०-दोहा ॥ ऋषिहिदेखिहरषैहियो, रामदेखिकुम्हिलाइ ॥
धनुषदेखिडरपैमहा, चिन्ताचत्तडोलाइ ॥ ४१ ॥ स्वाग
ताछन्द ॥ रामचन्द्रकटिसोंपटुबांध्यो । लीलयैवहरको
धनुसाध्यो ॥ नेकुताहिकरपल्लवसोंछ्वै ॥ फूलमूलाजिमिटूक
करचोद्वै ॥ ४२ ॥ सवैया ॥ उत्तमगाथसनातजबै धनुश्री
रघुनाथजुहाथकैलीनो । निर्गुणतेगुणवंतकियो सुखकेशव
संतअनंतनदीनो । ऐंचोजहींतबहींकियोसंयुत तिच्छकटाक्ष
नराच नवीनो । राजकुमारनिहारिसनेहसोशंभुकोसांचोश-
रासनकीन्हो ॥ ४३ ॥ प्रथमतंकोर झुकिझारिसंसारमदचंड
कोदंडरह्योमांडिनवखंडको । चालिअचलाअचलघालिदि-
गपालबलपालिऋषिराजकेवचनपरचंडको । सोधुदईशको
बोधुजगदीशकोक्रोधउपजाइभृगुनंदबरिबंडको । बांधिवरस्वर्ग
कोसाधिअपवर्गधनुभंगकोशब्दगयोभेदिब्रह्मांडको ॥ ४४ ॥
टी०- ॥ ४१ ॥ कटिसों कहे कटिमेंफूल मूलपोनारी लीलहि सों हरको
धनु साध्यो यहौ पाठ है ॥ ४२ ॥ उत्तम गाथकहे गान जिनको औ सनाथ