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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 269 में से

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पृष्ठ 54

( ४८ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
॥ २६ ॥ सवैया ॥ लोकनकौरचनारचिबेकोजहींपरिपूरणबु
द्धिविचरी । ह्वैगइकेशवदासतहीसबभूमिअकाशप्रकाशि
तभारी । शुद्धसलाकसमानलसी अतिरोषमईदृगदीठिति-
हारी । होतभयेतब सूरसुधाधर पावकशुभ्रसुधारँगधारी ॥
॥ २७ ॥ दोहा ॥ केशवविश्वामित्रके, रोषमईदृगजानि ॥
संध्यासीतिहुँलोकमें; किहिनिउपासीआनि ॥ २८ ॥ जनक-
दोधकछंद ॥ एसुतकोनकेशोभहिसाजे । सुंदरश्यामलगौ
रविराजे ॥ जानतहौजियसोदरदोऊ । कैकमलाविमला
पतिकोऊ ॥ २९ ॥
टी०-जिनके लोक रचना रचिबेकी सामर्थ्य है तिनको वचन रचना करिबो
कहा है ॥ २६ ॥ परिपूरण बुद्धि कहे निश्चयबुद्धि सों बुद्धि भूमि औ आकाशमें
प्रकाशित भई अर्थ-फैलत भई अथवा भूमिअकाश सहित प्रकाशित भयो प्रगट भई
अर्थ सब विषय हस्तामलकवत् देखि परचो तासमय शुद्ध कहे तीक्ष्ण शलाक बाण
समान तिहारी रोषमयी दृष्टि लसी तासों सूर सूर्य सुधाकर चंद्रमा सरिस भयो औ
अग्नि अमृतके रंगभये अर्थ अति भयसों तेजहीन श्वेतभये “शलाका शल्य
मदन शारिका शल्यकीपुच ॥ छत्रादि काष्ठो शरयोरिति मेदिनी” ॥ २७ ॥
संध्यासम अरुणनेत्र भये तब जैसे तीनों लोकमें सब दोष निवारणार्थ संध्याकी
उपासना करतहैं तैसे रोष निवारणार्थ ब्रह्मादि सब उपासना करतभये अर्थ
सब आधीनह्वै स्तुति करतभये ॥ २८ ॥ दुहुनको सम सौंदर्यादि देखि यह मैं
जीमें जानत हौं कि ए दूनों सहोदर सगे भाई हैं औ कै कोऊ कहे कौनों रूप-
धारी कमलापति विष्णु विमलापति ब्रह्मा हैं आशय यह कि इनमें विष्णु ब्रह्मा-
सम सौंदर्यादि गुण हैं ॥ २९ ॥
मू०-विश्वामित्र ॥ चौ०-सुंदरश्यामलरामसुजानों । गौ
रसुलक्ष्मणनामबखानों ॥ आशिषदेहुइन्हेंसबकोऊ । सूरज
केकुलमंडनदोऊ ॥ ३० ॥ दोहा ॥ नृपमणिदशरथनृपति
के, प्रगटेचारिकुमार ॥ रामभरतलक्ष्मणललित, अरु शत्रु
घ्नउदार ॥ ३१ ॥ घनाक्षरी ॥ दानिनकेशीलपरदानकेप्र