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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 269 में से

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पृष्ठ 53

पंचमप्रकाशः ५. ( ४७ )
देश सों अथवा गानकरे सों अथवा कथा सुनि कै लोकन के प्राणिन को अज्ञान
दूरि होत है । ज्ञानी होत हैं फेरि कैसी है कि दीप ज्योति भवभूषण जो भस्म
है तासों अर्थ गुलसों भूषित होति है औ यह भव जो संसार है ताके जे भुवन कुंड-
लादि हैं तिनसों नहीं भूषित होती अर्थ कुंडलादि धारण सुखमें नहीं लिप्त होती
औ दीप ज्योतिमें मषी जो मसी है कज्जल रति सों लगति है अरु यामें
गजादिरूपी जो मषी है सो नहीं लागति अर्थ गजादि आरोहण सुखभोगमें
लिप्त नहीं होती आदि पदते रथास्वादि जानो औ दीप ज्योति थलहींमें पूर्ण
रहति है औ यह जलहू थलमें परिपूरण है अर्थ--जल थलमें प्रसिद्ध है योगसों
जीवन्मुक्त है तासों राज्यसुखमें लिप्त नहीं होत इतिभावार्थः ॥ २३ ॥
मू०--जनक-तारक ॥ यहकीरतिऔरनदेशनसोहै । सु
निदेवअदेवनकोमनमोहै ॥ हमकोवपुरासुनियेऋषिराई ।
सबगांउंछसातककीठकुराई ॥ २४ ॥ विश्वामित्र-विजय ॥
आपने आपनेगैरनितौभुवपालसबैसुवपालैंसदाई । केवल
नामहिकेभुवपालकहावतहैंभुवपालिनजाई । भूपनिकीतुमहीं
धरिदेहबिदेहनमें कलकीरतिगाई ॥ केशवभूषणकीभवभूषण
भूतनतैंतनयाउपजाई ॥ २५ ॥
टीका-जा प्रकार तुम वरण्यो यह कीरति और बडे राजनमें मोहति है या
लायक हम नहीं हैं ॥ २४ ॥ पतिको धर्म है स्त्रीसों पुत्र कन्या उपजावै सो
भूमिरूपी स्त्री है तासों और काहू भूपति नहीं उपजायो तासों केवल नामहीके
भूपाल भूपतिकी देह कोऊ नहीं धरे औ तुम भव संसार में भूषणनहूं को
भूषण अर्थ जाते भूषण शोभा पावत हैं अति सुन्दरी ऐसी तनया पुत्री भूतन
पृथ्वीके तन देह ते उपजायो तासों भूपन की देह केवल तुम्हीं धरे हो औ ताहू
पर तुम्हारी कल कहे निर्दोष कीरति विदेहन में गई है कहावत विदेह हौ यासों
या जनायो कि भोग राज्यको करत हौ यश जीवनयुक्त तपस्विनमें गायो है
याते तुमसम कोऊ राजा नहीं हैं ॥ २५ ॥
मू०-जनक--दोहा ॥ इहिंविधिकीचिंतचातुरी, तितको
कहा अकत्थ ॥ लोकनकीरचनारुचिर, रचिबेकोसमरत्थ ॥