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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 50

( ४४ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
मू०--लक्ष्मण-दोहा ॥ जहींबारुणीकीकरी, रंचकरुचिद्वि
जराज ॥ तहींकियोभगवन्तबिन, संपतिशोभासाज ॥ १५॥
तोमरछन्द ॥ चहुँभागबागतडाग । अबदेखियेबडभाग ॥
फलफूलसोंसंयुक्त । अलियोंरमैजनमुक्त ॥ १६॥राम-दोहा॥
तिननगरीतिननागरी, प्रतिपदहंसकहीन॥जलजहारशोभितन
जहँ, प्रगटपयोधरपीन ॥ १७ ॥
टी०--वारुणी पश्चिमदिशा औमदिरा द्विजराज चन्द्रमा औ ब्राह्मण भगवंत
सूर्य औ ईश्वर संपत्ति चांदनी औ द्रव्यशोभा अंग छबिदुवौमें जानो सूर्योदय-
सों पश्चिम दिशामें शोभारहित चंद्रबिंब देखि श्लेषोक्तिसों वर्णन करयो जो ब्राह्मण
मदिराकी रुचि इच्छा करतहै ताको ईश्वर संपत्त्यादि सों हीन करत हैं ॥ १५ ॥
चहुँ भागचारौंवोरमुक्त साधुजन ॥ १६ ॥ जा जनकदेशगेते नगरी पुरी औ
तेनागरी स्त्री नहीं हैं जे प्रतिपदस्थान स्थान प्रति औ चरण चरण प्रति हंसपक्षी
ओक कहे जल औ हंसक बिछुवन सों हीन है औ जहां कहे जिनमें पीन बडे
पयोधर वापी कूपतडागादि औ कुचनमें जलज कमल औ मोतिनके हार समूह औ
माला नहीं शोभित अर्थ सब नगरिनमें जलाशय जल युक्त हैं तिनमें कमल
फूलैहैं औ हंस बसत हैं औ स्त्री मोतिनके माला औ बिछुवा पहिरे हैं यासों या
जनायो कि विधवा नहीं है और अथ-जो देश तिन नगरिन औ तिन नागरिन
सों युक्त है युक्तेतिशेषः । जिनके प्रतिपद् कहे मग राजमार्गोंति औ पग चिह्न
जे धूरिमें अंकित होत हैं तेई हंसपक्षी औकजल औ बिछुवन करिहीन हैं अर्थ
नगरीमें राजमार्ग छोड़ि अन्यत्र हंसयुक्त जल शोभितहै औ स्त्रिनके पग चिन्हही-
में बिछुवा नहीं हैं औ पगनमें सब बिछुवा पहिरेंहैं ओप जहां कहे जिन नगरिनमें
औ स्त्रिनमें शोभितन जलज हारन कमल समूहन औ मोतीमालनसों युक्त पीन
बडे पयोधर तडागादि औ कुचहैं ॥ १७ ॥
मू०-सवैया ॥ सातहुदीपनकेअवनीपतिहारिरहेजियमें
जबजाने । बीसबिसेब्रतभंगभयोसोकहौ अबकेशवकोधनुता-
ने । शोककिआगिलगीपरिपूरणआइगयेघनश्यामबिहाने ।
जानकिकेजनकादिककेसबफूलिउठेतरुपुण्यपुराने ॥ १८॥