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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 47

पञ्चमप्रकाशः ५. (४१)
टीका-॥ २९ ॥ हतेकहेबाणादि सों वेधे अर्थ-मेरे दास इहां उहां यज्ञादि
विघ्नकरत फिरत हैं तिनको जो कोऊ सताइहै तो तिनकी रक्षाको जैहौं ॥ ३० ॥
जब मारीचादिको रामचन्द्र मारयो है तब तिनको आरत पीडित दुःखितेति शब्द
सुनि रावण स्वयंवर सभाते गयो सो भेद कछू ब्राह्मण तौ जानत नहीं तासों
संदेह विशिष्टहै कहतहै कि कहूँ बली कहूँ कौन्ह्यौ स्थानमें शर बाणसों आशग
कहे काहू राक्षसको मारचो “क्रव्यादोस्त्रप आस्र इत्यमरः” । सुद्भासुर मारिय
कहूँ यह पाठ है तौ सुद् नामा राक्षसते भा कहे उत्पन्न जो असुर राक्षस है मारीच
ताको सुद् नाम राक्षसकी स्त्री ताड़का है ताको पुत्रमारीच है औ कहूँ शरमारीच
मारिय पाठ है तौ शरसों मारीच नामा राक्षसको मारचो ॥ ३१ ॥
अनंग विदेह ॥ ३२ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीप्रसादाय जनजानकीप्र-
सादनिर्मिताया रामभक्तिप्रकाशिकायाचतुर्थःप्रकाशः ॥ ४ ॥
मू०--दोहा ॥ यहप्रकाशपंचमकथा, रामगवनमिथिला
हि ॥ उद्धारणगौतमघरनि, स्तुतिअरुणोदयआहि ॥ १ ॥
मिथिलापतिकेवचनअरु, धनुभंजनउरधार ॥ जैमालादुंडु
भिअमर, वर्षनफूलअपार ॥ २ ॥ ब्राह्मण-तारकछंद ॥ जब
आनिभईसबकोदुचिताई । कहिकेशवकाहूपैमेटिनजाई ।
सियसंग लियेऋषिकीतियआई। इकराजकुमारमहासुखदाई ३॥
मोहनछंद।सुंदरवपुअतिश्यामलसोहै। देखतसुरनरकोमनमोहै
आनिलखीसियकोबरुऐसो । रामकुमारहिदेखियजैसो ॥४॥
तोटकछंद ॥ ऋषिराजसुनीयहबातजहीं । सुखपायचलेमि
थिलाहितहीं ॥ बनरामशिलादरशीजबहीं । तियसन्दररूप
भईतबहीं ॥ ५ ॥ विश्वामित्र-सोरठा ॥ गौतमकीयहनारि,
इन्द्रदोषदुर्गतिभई ॥ देखितुम्हेंनरकारि, परमपतितपावनभ
इ ॥ ६ ॥ कुसुमवि-चित्राछन्द ॥ तेहिअतिहरषेरघुपतिदे-
ख्यो । सबगुणपूरेतनमनलेख्यो ॥ यहबरमाँग्योदियोनका