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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 28, कुल 269 में से

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पृष्ठ 28

( २२ ) राजचन्द्रिका-सटीक ।
टी०-॥ १ ॥ २ ॥ कृतयुग सत्ययुग ॥ ३ ॥ मल्ल बाहु युद्धंकर पायक
पटंवाज नटककहे नाचत हैं नर्तक नृत्यकारी ॥ ४ ॥ ५ ॥ जहाँ सिंहासनमें
राजा दशरथ बैठे हैं सो आदिहै तहाँते जहाँ पर्यंत दरबारी बैठे हैं सो अंत है
सो आदिते अंततक दरबारिनमें कौन दास कहे सेवकहै औ कौन संत कहे स्वामीहै
यह नहीं जानियत अर्थ सब दरबारी राजसाज सँवारे हैं। “सद्भिद्यमाने सत्ये च
प्रशस्तांचितसाधुषु” इत्यभिधानचिंतामणिः ॥ इहाँ अर्चितपदको पर्याय
स्वामीजानो ॥ ६ ॥ देवदेव इंद्र ॥ ७ ॥ गुदरानो जाहिर कियो करतार
ब्रह्मा ॥ ८ ॥ ९ ॥ बेताल भाट ॥ १० ॥
मू०-बैतालाघनाक्षरी ॥ बिधिके समानहैंविमानीकृतरा-
जहंस, विविधविबुधयुतमेरुसो अचलहै । दीपतिदीपतिअ-
तिसातौंदीपदीपियतु, दूसरोदिलीपसोसुदक्षिणाकोबलहै ।
सागरउजागरकीबहुवाहिनीकोपति, छनदानप्रियकियौसूर-
जअमलहै । सबविधिसमरथराजैराजादशरथ भगीरथपथ-
गामीगंगाकैसोजलहै ॥ ११ ॥ दोहा ॥ यद्यपिईंधनजरिगये,
अरिगणकेशवदास ॥ तदपिप्रतापानलनके, पलपल बढ़त
प्रकाश ॥ १२ ॥ तोमरछन्द ॥ बहुभाँतिपूजिसुराई । कर-
जोरिकैपरेपाई ॥ हँसिके कह्योऋषिमित्र । अबबैठराजप-
वित्र ॥ १३ ॥ मुनिसुनिदानमानसहंस । रघुवंशके अवतंस ॥
मनमाँहजोअतिनेहु । यकबातमाँगिदेहु ॥ १४ ॥
टीका-बिमानी कृत कहं वाहनी कृतहैं राजहंस जिन करिकै ब्रह्माको हंस-
वाहन है और राजा विमानीकृत कहे मानरहित कियेहैं राजनकेहंस जीवजिनक-
रिकै अथवा विमानीकृत वाहनीकृतहैं राजनके हंसजीव जिन करिकै अर्थ--शत्रु
भयसों मित्र प्रेम सों मनमें चढ़ाये रहत है विबुध देवता औ पंडित दिलीप की
स्त्रीको सुदक्षिणा नाम रह्यो ताके पातिब्रत को बल रह्यो औ सुष्ठु जो दक्षिणा
दानद्रव्यहै वाहिनी नदी औ चमूक्षण दारा त्रिनहौ हे प्रिय ! जाकी सूरजके अमल-
में अर्थ सूर्यके प्रकाशमें रात्रिको नाश होत है अथवा क्षणनदान कहे जलांजलि