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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 27

द्वितीयप्रकाशः २. ( २१ )
टी०-मूलजर अधोगति नर्क औ नीचेको गति गमन हुताशन अग्नि दुर्गति
नर्क औ दुष्कारि कहेगति जिनमें कुटिलता इति श्री फलद्रव्य औ विल्वफल
कूचनकी उपमा देवेको परिसंख्यालंकार है ॥ ४७ ॥ चलदल पीपर वृक्षवनी
वाटिका सोइ विधवाहै याहूमें परिसंख्या है ॥ ४८ ॥ नागर प्रवीण मित्र सूर्य जो
सदा सब वस्तु पाइवेकी इच्छाहै सो तृष्णा जानो औ जो कछू वस्तु देखि
सुनिकै इच्छा चलै सो लोभ जानो ॥ ४९ ॥ ५० ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादायजनजानकीप्रसाद
निर्मितायां रामभक्तिप्रकाशिकायां प्रथमः प्रकाशः ॥ १ ॥
मू०-दोहा ॥ या द्वितीय प्रकाशमें, मुनि आगमन प्रकाश ॥
राजासों रचना वचन, राघव चलन विलास ॥ १ ॥
हंस छंद ॥ आवत जात राजके लोग । मूरति धारी मानहुँ
भोग ॥ २ ॥ मालतीछंद ॥ तहँदरबारी । सबसुखकारी ॥
कृतयुग कैसे । जनुजन वैसे ॥ ३ ॥ दोहा ॥ महिष मेष
मृग वृषभ कहुँ, भिरत मल्ल गजराज ॥ लरत कहूँ, पायक
नटत, बहु नर्तक नटराज ॥ ४ ॥ समानिका छंद ॥ देखि
देखिकै सभा । विप्र मोहियो प्रभा ॥ राजमंडली लसै ।
देवलोकको हँसै ॥ ५ ॥ मल्लिकाछंद ॥ देशदेशके नरेश ।
शोभिजैसैबैसुवेश ॥ जानियेनआदिअंत । कौनदासकौन
संत ॥ ६ ॥ दोहा ॥ शोभितबैठे तेहिसभा, सातद्वीपके
भूप ॥ तहँराजादशरथलसै, देवदेव अनुरूप ॥ ७ ॥ देखि
तिन्हैंतबदूरिते, गुदरानो प्रतिहार ॥ आयेविश्वामित्रजू, जनु
दूजोकरतार ॥ ८ ॥ उठिदौरेनृपसुनतहीं, जाइगहेतबपाइ ॥
लै आयेभीतरभवन, ज्यौंसुरगुरुसुरराइ ॥ ९ ॥ सोरठा ॥
सभामध्येबैताल, ताहिसमयसोपढिउठ्यो ॥ केशवबुद्धिवि-
शाल, सुंदरमूरतिभूपसो ॥ १० ॥