रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
DevanagariHindipublished269 पृष्ठ
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( २६० ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
श्वेततासों अपनी श्वेतताही न समुझि चंद्रकादि दुःखी होतहैं ॥ २५ ॥ २६ ॥
माहीं (मरातिव) प्रसिद्ध है छरी (आशा) ॥ २७ ॥ सुरभि (सुगंधि)
॥ २८ ॥ २९ ॥
मू०-झूलनाछंद ॥ तबलोकनाथविलोकि कैरघुनाथकोनि-
जहाथ । सबिशेषसोंअभिषेककीपुनिउचरीशुभगाथ ॥ ऋषि
राजइष्टवशिष्ठसोंमिलिगाधिनन्दनआइ। पुनिबालमीकिबिया-
सआदिजितेहुतेमुनिराइ ॥ ३० ॥ रघुनाथशंभुस्वयंभुकोनिज
भक्तिदीसुखपाइ । सुरलोककोसुरराजकोकियदीहनिर्भयराइ ।
बिधिसोंऋषीशनसोंबिनयकरिपूजिऔपरिपाई । बहुधाइईत-
पव्रक्षकीसबासिद्धि सिद्धसुभाइ ॥ ३१ ॥
टी०-लोकनाथ जे ब्रह्मा हैं तिन अभिषेककी घटिका आई बिलोकिकै निज
हाथसों रघुनाथको अभिषेक की कहे कर