रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपड़्विंशप्रकाशः २६. ( २५७ )
शावै। कहैनामपूरोसोबैकूंठपावै॥ सुधारैंदुहूंलोककोवर्णदोऊ।
हियेछद्मछांड़ैकहैवर्णकोऊ ॥ ६ ॥ सुनावैसुनैसाधुसंगीकहावै।
कहावैकहैपापपुंजैनशावै ॥ स्मरावैस्मरैवासनाजारिडारै। तजै
छद्मकोदेवलोकैसिधारै ॥७॥ तामरसछंद ॥ जबसबवेदपुराण
नशैंहैं। जपतपतीरथहूमिटिजैंहैं ॥ द्विजसुरभीनहिंकोउविचारै।
तबजगकेवलनामउधारै ॥ ८ ॥ दोहा ॥ मरणकालकाशीविषे-
महादेवनिजधाम ॥ जीवनकोउपदेशिहैं,रामचन्द्रकोनाम॥९॥
मरणकालकोऊकहै, पापीहोइपुनीत ॥ सुखहीहरिपुरजाइहै,
सबजगगावैगीत ॥ १० ॥
टी०-और मंत्र पुरश्चरणादिसों सिद्ध किये जात हैं औ याके शुद्ध उच्चार
सदाही सिद्ध हैं॥ ५ ॥ आधो नाम रा अथवा म अधोगति (नरक) इति,
पूरे नामके जपसों बैकुंठ प्राप्तिहोतिहै मृत्युलोकमें कहा होत है ता लिये फेरि
कहत हैं कि राम ये जे दुवौ अंक (वर्ण) हैं ते मृत्युलोक, स्वर्गलोक दुवौ सुधा-
रत हैं मृत्युलोकमें यश गौरवादिको लाभ होत है, बैकुंठमें देवसुख प्राप्त होत है
इत्यर्थः ॥ ६ ॥ ७ ॥ ८ ॥ ९ ॥ १० ॥
मू०-रामनामेकतत्त्वको, जानतवेदप्रभाव, ॥ गंगाधरकैध-
रणिधर, बालमीकिमुनिराव ॥ ११ ॥ दोधकछंद ॥ सातहु
सिंधुन्केजलह्वरे। तीरर्थजालनिकेपयपूरे॥ कंचनकेघटबानर
लीने। आइगयेहरिआनँदभीने ॥ १२ ॥ दोहा ॥ सकलरत्न
मयमृत्तिका, शुभऔषधीअशेष ॥ सातद्वीपकेपुष्पफल, पल्ल-
वससविशेष ॥ १३ ॥ दोधकछंद॥आंगनहीरनकोमनमोह्रै॥
कुंकुमचन्दनचर्चितसोहै ॥ हैसरसीसमशोभप्रकाशी ।
लोचनमीनमनोजविलाशी ॥ १४ ॥ दोहा ॥ गजमोतिनयुत
शोभिजैं, मरकतमणिकेथार ॥ उदकबुन्दसोंजनुलसत, पुर-
इनिपत्रअपार ॥ १५ ॥ बिशेषकछंद ॥ भांतिनभांतिनभाज-
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