रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २५६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
टी०-वाम कहे कुटिल साधन कहे उपाय अर्थ मुक्तिको उपाय केवल तुम्हारे
नामको जप है ॥ ४० ॥ जो आपनो ईश्वरत्व मोहि काहूको जनाइबोई नहीं रह्यौ
सो सबही जान्यौ तासों जो कहौ सो अब करिये अर्थ राज्य लेबेकी कहत
हौ सो लेहैं ॥ ४१ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादायजनजानकीप्रसादनिर्मितायां
रामभक्तिप्रकाशिकायां पंचविंशः प्रकाशः ॥ २५ ॥
मू०-दोहा ॥ कथाछबीसप्रकाशमें, कह्योवशिष्ठविवेक ॥
रामनामकोतावअरु, रघुबरकोअभिषेक ॥ १ ॥ तोटनकछंद ॥
बोलेऋषिराजभरथतबै । कीजैअभिषेकप्रयोगसबै ॥ शत्रुघ्न-
कह्योचुपह्वैनरहै । श्रीरामकेनामकोतत्त्वगहौ ॥ २ ॥
टी०-जब रामचन्द्र राज्य अंगीकार करचौ तब ऋषिराज-(वशिष्ठ) सों
भरत बोले प्रयोग (यत्न) शत्रुघ्न भरतसों कह्यो कि चुप क्यों नहीं है रहते
अर्थ राज्याभिषेक तौ रामचन्द्र अंगीकार करचौ है तौ हैहैई ॥ १ ॥ जो ऋषि-
राज कह्यौ है कि सबको साधन एक जग, राम तिहारो नाम ॥ तारामनामकी
तत्त्व ऋषिसों गहौ अर्थ सुनिकै धारण करौ ॥ २ ॥
मू०-राम-तोटनकछन्द ॥ श्रद्धाबहुधाउरआनिभई।ब्रह्मासु-
तसोंबिनतीबिनई ॥ श्रीरामकोनामकहौरुचिकै । मतिमानमहा-
मनकोशुचिकै ॥ ३ ॥ वशिष्ठ--स्वागताछंद ॥ चित्तमांझजस
आनिअरुझी । बाततातकहँमैंयहबूझी ॥ योगयागकरिजै
: आवै । स्नानदानविधिमर्मनपावै ॥ हैअशक्तसबभांतिबिचारे
कौनभांतिप्रभुताहिउधारो ॥ ४ ॥
टी०-शत्रुघ्नके उरमें बडी श्रद्धा भई ॥ ३ ॥ अरुझी अर्थ संदेह भई ता
( ब्रह्मा ) मर्म ( सिद्धान्त ) ॥ ४ ॥
मू०-ब्रह्मा-भुजंगप्रयातछन्द ॥ जहाँसच्चिदानन्दरूपैधरैंगे ।
सुत्रैलोक्यकोतापतीन्योंहरैंगे । कहैगोसबैनामश्रीरामताको ।
सदासिद्धहैशुद्धउच्चारजाको ॥ ५ ॥ कहैनामआधोसोआधोन