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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 255, कुल 269 में से

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पृष्ठ 255

पञ्चविंशप्रकाशः २५. ( २४९ )

निजगमेंकृपाल ॥३॥ निशिपालिकाछन्द ॥ लोभमदमोहब-
शकामजबहींभयो । भूलिगयेरूपनिजबेधितिनसोंगयो ॥ रा-
म ॥ बूझियतबातयहकैनविधिउद्धरै ॥ बशिष्ट ॥ वेदविधिशो-
धिबुधयत्नबहुधाकरै ॥४॥ राम-दोहा ॥ जितलैजैहैबासना,
तिततितहैहैलीन ॥ यत्नकहौकैसेकरे, जीवबापुरोदीन ॥ ५ ॥
बशिष्ट-दोधकछन्द ॥ जीवनकीयुगभांतिदुराशा ॥ होतिशुभा-
शुभरूपप्रकाशा । यत्ननसोंशुभपन्थलगावै । तौअपनोत-
हींपदपावै ॥ ६ ॥
टी०- १ जीवनके जे अनेक जन्म हैं तिनको समुझौं कहे जानत हौ अथवा
अनेक जे जीव हैं तिनके जन्मको अर्थ जा प्रकारसों जीवनकी उत्पत्ति है ताको
समुझौ कहे मोसों बूझत हौ ॥ २ ॥ सब वस्तु जानिहूकै जो हमसों बूझियत कहे
पूंछतहौ तौ सुनौं हम कहियत हैं जगमें जो ब्रह्मनाम कह्यो है अर्थ जिनको
ब्रह्मनाम है तिनके जे प्रतिबिंब जा प्रतिबिंब समूह हैं तेई जीव हैं यह मत प्रति-
बिंबवादिनको वेदांतमें प्रसिद्ध है ॥ ३ ॥ अपनो जो रूप ब्रह्म है ताको भूलि-
गये तिनसों लोभादिसों ॥ ४ ॥ वासना (दुराशा) ॥ ५ ॥ शुभ दुराशा जो
ईश्वर पूजनादिकी आशा है ताके पंथमें जीवको अथवा मनको लगावै तो
अपनो जो पद (स्थान) है ब्रह्मस्थान ताको पावै अर्थ शुभवासनाको ग्रहण
करै ताके बाद ताहू वासनाको त्याग करि ब्रह्मपदको प्राप्त होय ॥ ६ ॥
मू०-हौंमनतेनिधिपुत्रउपायो। जीवउधारणमंत्रबतायो ॥
हैपरिपूर्णज्योतिंतिहारी । जाइकहीनसुनीननिहारी ॥ ७॥
दोहा ॥ ताकीइच्छातेभये, नारायणमतिनिष्ठ ॥ तिनतेचतु-
राननभये, तिनतेजगतप्रतिष्ठ ॥ ८ ॥ दोधकछंद ॥ जीवस-
बैअवलोकिदुखारे । आपनचित्तप्रयोगबिचारे ॥ मोहिंसुनाये
तुम्हेंतेसुनाऊं । जीवउधारणगीतगुनाऊं ॥ ९ ॥ दोहा-मुक्ति
पुरीदरबारके, चारिचतुरप्रतिहार । साधुनकोसतसंगसम,