रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४८ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
केवल देह त्याग करिवेहीकी इच्छा है ॥ २८ ॥ रत कहे अनुरक्त ॥ २९ ॥
देवकी सबै सभा आइयो कहे आवत भई सो राजलोक कहे राजभवनकी प्रभा
देखि मोहियो कहे मोहित भई ॥ ३० ॥
मू०- विश्वामित्र ॥ व्यासपुत्रकेसमानशुद्धबुद्धिजानिये । ई-
शकोअशेषतत्त्वतत्त्वसोबखानिये ॥ इष्टहौबशिष्ठशिष्टनित्यव-
स्तुशोधिये । देवदेवरामदेवकोप्रबोधबोधिये ॥ ३१ ॥
टी०-विश्वामित्र वशिष्ठसों कहत हैं कि हम तुमको व्यासपुत्र जे शुकाचार्य्य हैं
तिनके समान शुद्ध बुद्धि कहे ज्ञानयुक्त है बुद्धि जिनकी ऐसे जानियत हैं
अर्थ अतिज्ञानी हौ और ईश जे ईश्वर हैं तिनको जो अशेष कहे संपूर्ण तत्त्व कहे
स्वरूप है ताको तत्त्व कहे सिद्धांत सो अर्थ निश्चयात्मक बखानि एक हेतु कहत
हैं ॥ “तत्त्वस्वरूपेपरमात्मनीतिमेदिनी ॥” हे शिष्ट कहे श्रेष्ठ ! वशिष्ठ ! तुम इष्ट
कहे रघुवंशके गुरु हौ और नित्य जो वस्तु है ताको शोधिये कहे ढूंढो करत हौ
सो सब विधिसों तुमको उचित है तासों देवके देव जे राम देव हैं तिनको प्रबोध
जो ज्ञान है तासों बोधिये कहे बोध करौ अर्थ जीवोद्धारको मत रामचंद्र पूछत
हैं सो कहौ ॥ ३१ ॥
इति श्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीरामचन्द्रचंद्रिकायामिन्द्रजिद्विर-
चितायांजगन्निन्दावर्णनं नाम चतुर्विंशतितमः प्रकाशः ॥ २४ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्रसादनिर्मिताया
रामभक्तिप्रकाशिकायां चतुर्विंशतितमः प्रकाशः ॥ २४ ॥
मू०-दोहा ॥ कथापचीसप्रकाशमें, ऋषिबशिष्ठसुखपाइ ॥
जीवउधारणरीतिसब, रामहिंकह्योसुनाइ ॥१॥ बशिष्ठ-पद्ध-
टिकाछन्द ॥ तुमआदिमध्यअवसानएक । अरुजीवजन्म समु-
झौअनेक ॥ तुम्हींजोरचीरचनाबिचारि । त्यहिकौनभांतिस-
मुझौमुरारि ॥ २ ॥ सबजातिबूझियतमोहिंराम । सुनियेजोक-
हौंजगब्रह्मनाम ॥ तिनकेअशेषप्रतिबिम्बजाल । त्यइजीवजा