रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विंशप्रकाशः २४. ( २३७ )
ई॥ ४॥ हैपितुमातनितेदुखभारे । श्रीगुरुतेअतिहोतदुखारे ॥
भूखन्प्यास ननींदनजोवें । खेलनकोबहुभांतिनरोवें ॥ ५ ॥
टी०-वशिष्ठसों बोध जो ज्ञान है ताके कहिबेको विश्वामित्र कही कहे कह्यो
हैं ॥ १ ॥ राजश्रीको दुख कहि अब यामें संसारको दुख देखावत हैं जीव जे
हैं ते मरणको नहीं तजत मरिकै फिरि जन्मको भजहीं कहे प्राप्त होत हैं ॥२॥
यामें जनन, मरण, जीवनको दुख देखावत हैं प्रथम तौ जीव उदरमें परत हैं
गर्भमें आवत हैं तहांसे बहुत दुखसों निसरत हैं अर्थ जन्ममें बडो दुख होत हैं
औ अंत जो मरण है ताहूमें बडी पीर कहे कष्ट होत है औ अनतही कहे जनन
मरणते अन्यत्र अर्थ जीवतनमें तनके अनेक जे उपचार कहे व्योहार हैं तिनके
सहित जीवको पीर है सो आगे कहैं ॥ “उपचारस्तु सेवायां व्यवहारोपचारयोरि-
त्यभिधानचिंतामणिः”॥ ३ ॥ द्वैछंदनमां शिशुता अवस्थाके देहव्यवहारमें प्राप्ति
जीवको दुख कहत हैं ते कहे तेई जीव शैशव कहे बाल्य अवस्थामें पोच कहे
बुरो विषादि औ भली द्राक्षादि कछू जियमें नहीं जानत जो वस्तु पावत हैं
ताको लैके आनन कहे मुखमें आनै कहे डारि लेत हैं तहां विषादि ग्रहणमें
जीवको पीडा होति है इति भावार्थः फेरि ते कहे तेई जीव कछू बडे होत कहे
बडे होते अयान कहे अज्ञानमें चढे चढे गैलनमें खेलत फिरतहैं अज्ञानमें चढे कहि
या जनायो कि जैसे वाहनमें चढिकै कोऊ धावै तौ थकत नहीं तैसे अज्ञानरूपी
बाहनमें चढि खेलमें धावत जीव थकत नहीं है ॥ ४॥ ता खेलिबेके लिये माता
पिता मने करत हैं तासों बडो दुख होतहै औ गुरु खेलिबो छडाई पढाइबो
चाहत है तासों अति दुखी होतहैं औ भूख औ प्यास औ नींदको नहीं जोवत
कहे देखत अर्थ अपने पास आई भूख प्यास नींदको नहीं गनत अथवा भूख
प्यास नींदको नहीं जोवत कहे चाहत तैसे सब अवस्थाके ऐसे देहव्यवहारनमें
जीवको ऐसी पीडा होतिहै इति भावार्थः॥ “शिशुत्वं शैशवं बाल्यमित्यमरः”॥५॥
मू०-जारतिचित्तचितादुचिताई। दीहत्वचाअहिकोपचवाई।
कामसमुद्रझकोरनिझूल्यो । यौबनजोरमहाप्रभुभूल्यो ॥ ६ ॥
धूमसोनीलनिचोलमैं सोहै । जाइछुई न विलोकत मोहै ॥ पावक
पायशिखाबनचारी । जारतिहैनरकोपरनारी ॥ ७ ॥
टी०-तीनिछंदमें युवा अवस्थाके व्यवहारको दुःख कहतहैं यौवनके जोरमें अर्थ
युवा अवस्थामें चित्तरूपी जो चिताहै तामें जीवको कहे दुचिताई जो संशय है सो