सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 269 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 242

( २३६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
शीघ्रता जाकी ॥ ३६ ॥ मृगया यहै शूरता बडी इत्यादिमों या जनायो कि
योंही विधि राजा थोरो करत हैं ताको बहुत मानि लेत हैं ॥ ३७ ॥ पदवी
( राज्य ) ॥ ३८ ॥ ३९ ॥
मू०--चौपाई ॥ कहौंकहालगिताकेसाज । तुमसबजानतहौ-
ऋषिराज ॥ जैसीशिवमूरतिमानिये । तैसीराजश्रीजानिये
॥४०॥ सावधानहैसैबैजाहि ॥ सांचीदेतपरमपदताहि । जित-
नेतृपयाकेबशभये । पेलिस्वर्गमगनर्कहिगये ॥ ४१ ॥
इति श्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीरामचंद्र
चंद्रिकायामिंद्रजिद्विरचितायांराज्यश्रीदूषणव-
र्णनंनामत्रयोविंशःप्रकाशः ॥ २३ ॥
टी०-॥ ४० ॥ शिवमूरतिहूको सावधान है विधिपूर्वक सेवनो बनि परै तो
स्वर्गप्राप्ति होत है ना बनै तौ चित्तविक्षेपादि है अंतमें नरकप्राप्ति होतहै तैसे
याहूको सावधान है जनकादि सम सेवन करै तौ स्वर्ग जाई परंतु सावधान है
सेवन नहीं बनि परत तासों केतने भूप बेनु आदिक स्वर्गमर्गसों पेलिकै नरकको
गये हैं तासों हम राज्यश्री ग्रहण ना करि हैं इति भावार्थः ॥ ४१ ॥
इतिश्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादायजनजानकीप्रसाद-
निर्मिताया रामभक्तिप्रकाशिकायां त्रयोविंशः प्रकाशः ॥ २३ ॥
मू०-दोहा ॥ चौबीसयेंप्रकाशमें, रामबिरक्तिबखानि ॥ बि-
श्वामित्रबशिष्ठसों, बोधकहीशुभआनि ॥ १॥ राम-अमृतगति-
छंद ॥ सुमतिमहाऋषिसुनिये।जगमहँसुखवनगुनिये॥मरणहिं
जीवनतजहीं । मरिमरिजन्मनभजहीं ॥ २ ॥ उदरनिजीवपरत
है । बहुदुखसोंनिसरतहै ॥ अंतहुपीरअनतहीं। तनउपचारसह-
तहीं ॥ ३॥ दोधकछंद ॥ पोचभलीनकछूजियजानै। लेसबब-
स्तुनआननआनै॥शैशवतेकछुहोतबडेई।खेलतहैंतैअयानचढ़े