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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 234, कुल 269 में से

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पृष्ठ 234

( २२८ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
मू०-मोटनकछंद ॥ शत्रुघ्नबिलोकतरामकहें ॥ डेरानिस
जौजहँसुःखलहैं ॥ मेरेघरसंपतियुक्तसबै । सुग्रीवहिदेहुनिवास
अबै ॥ २३ ॥ साजेजोभरथसबैधनको। राखौतहँजाइबिभी-
षणको ॥ नैऋत्यनकोकपिलोगनको। राखौनिजधामनिभो-
गनको ॥ २४ ॥ दोहा ॥ एकएकनैऋत्यको, जितनेबानर-
लोग । आगेहीठाढेरहत, अमितइंद्रकेभोग ॥ २५ ॥
इति श्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिन्तामणिश्रीरामचन्द्रचन्द्रिकायामिंद्रजि-
द्विरचितायांरामस्यायोध्यापुरप्रवेशोनामद्वाविंशः प्रकाशः ॥ २२ ॥
टी०-संपति ( अनेक भोग वस्तु ) ॥ २३ ॥ २४ ॥ अमित कहे
अप्रमाण ॥ २५ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्रसाद-
निर्मिताया रामभक्तिप्रकाशिकाया द्वाविशः प्रकाशः ॥ २२ ॥
मू०-दोहा ॥ या तेइसयेंप्रकाशमें ऋषिजनआगमलेषि ॥
राज्यश्रीनिंदाकही, श्रीमुखरामविशेषि ॥ १ ॥ मल्लिकाछंद॥
एककालरामदेव । सोधुबंधुकरतसेव ॥ शोभिजैसैबैसोऔर ।
मंत्रिमित्रठौरठौर ॥ २ ॥ बानरेशयूथनाथ । लंकनाथबंधु-
साथ ॥ शोभिजैसैबैसमीप । देशदेशकेंमहीप ॥ ३ ॥ दोहा ॥
सरसस्वरूपबिलोकिकै, उपजीमदनहिंलाज ॥ आइगयेताही
समय, केशवऋषिऋषिराज ॥ ४ ॥ असितअत्रिभृगुअं-
गिरा, कश्यपकेशव व्यास॥ विश्वामित्रअगस्त्ययुत, बालमी-
किदुर्बास ॥ ५ ॥
टी०-॥ १ ॥ २ ॥ बानरेश [ सुग्रीव ] यूथनाथ [ अंगदादि ] लंकनाथ जे बंधु
बिभीषण अथवा बंधु जे जातिवर्ग हैं राक्षस गण इति ते हैं साथ जिनके ऐसे लंकनाथ
जे बिभीषण हैं ते ॥ ३ ॥ सरस कहे आपनासों अधिक सुन्दर ॥ ४ ॥ ५ ॥