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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 233

द्वाविंशप्रकाशः २२. (२२७)

रआवैं । बारबारप्रतिधामनिधावैं ॥ देखिदेखितिनकोदैतारी ।
भांतिभांतिबिबिहसैंपुरनारी ॥ १९ ॥
टी०-॥ १६ ॥ रामचन्द्रजू भागनसों आये तासों मातन जीवन समपाये सो
अंकमें भरे कहे अति प्रेमसो छातीमें लगाये फेरि अंक जो गोद है तामें धरे
कहे बैठारे तब आनंदअश्रुनसों सीता राम लक्ष्मणको अन्हवाये औ ते सबै कौश-
ल्यादि माता रामादिके वदन निहारती हैं औ तिनपर सर्वस्व वारि वारि सबको
अर्थ याचक नेगिनको देती हैं औ तिन याचकनसों आशीर्वाद करि घनो लेती
हैं पावती हैं अर्थ याचक आशीर्वाद देते हैं कि जो हमको तुम दियो ताको कोटि
गुणित तुम्हारे होय अथवा रामादिके वदन दर्शनहीसों घनो लेती हैं पावती हैं
अर्थ मुखदर्शन करि घनो पायो सम मानती हैं ॥ १७ ॥ १८ ॥ रावर (स्त्री
भवन) ॥ १९ ॥
मू०-श्रीराम-दोहा ॥ इनसुग्रीवबिभीषणै, अंगदअरुहनु-
मान ॥ सदाभरतशत्रुघ्नसम, माताजीमैं जान ॥ २० ॥ सुमि-
त्रा-सोरठा ॥ प्राणनाथरघुनाथ, जियकीजीवनमूरिहौं॥ लक्ष्म-
णहेतुमसाथ, क्षमियहुचूकपरीजोकछु ॥ २१ ॥ राम-दंडक ॥
पौरियाकहौं कि प्रतीहारकहौं किधौं प्रभुपुत्र कहौं मित्र किधौं मंत्री-
सुखदानिये । सुभटकहौं किशिष्यदासकहौं किधौं दूत केशोदा-
सहायकोहथ्यारउर आनिये । नैनकहौं किधौं तनमनकिधौं
तन त्राण बुद्धिकहौं किधौं बल बिक्रम बखानिये । देखिबेको-
एकहैं अनेक भांतिकीन्हीसेवा लक्ष्मणके मात कौन कौनगुणगा-
निये ॥ २२ ॥
टी०-॥ २० ॥ २१ ॥ पौरियाजो मुख्यद्वारकी रक्षामें रहते हैं प्रतीहार जो
राजसभाद्वारमें सुवर्णादिको दंडलै ठाढो रहत है बल जोर विक्रम यत्न ये सब
एक एक आपनो आपनो कार्य करि सुख देत हैं सो लक्ष्मण जहा जाको
काज लाग्यो है तहा ताही विधि तौन काज करि हमको परम सुख दीन्हो
है ॥ २२ ॥