रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनरनारिभलीसुरनारिसबै । तिनकोऊपरैपहिंचानिअबै ॥
मिलिफूलनकीबरषैंबरषा । अरुगावतहैं जयकेकरषा ॥११॥
पद्मावतीछंद ॥ रघुनन्दनआयेलुनिसबधायेपुरजनजैसेतैसे॥
दर्शनरसभूलेतनमनफूलेबरणेजाहिनजैसे ॥ पतिकेसँगनारी-
सबसुखकारीरामहिंयोहगजोरी । जहँतहँचहुँओरनिमिलीझ-
कोरनिचाहतिचन्दचकोरी ॥ १२ ॥ पद्धटिकाछंद ॥ बहुभां-
तिरामप्रतिद्वारद्वार । अतिपूजतलोगसबैउदार ॥ यहिभांति-
गयेनृपनाथगेह । युतसुन्दरिसोदरस्योसनेह ॥ १३ ॥ दोहा॥
मिलेजायजननीनकों, जबहीश्रीरघुराइ ॥ करुणारसअद्भुत
भयोमौपैकह्योनजाइ ॥ १४ ॥ सीतासीतानाथजू, लक्ष्मण
सहितउदार । सबनमिलेसबके किये, भोजनएकहिबार ॥१५॥
टी०-अति सुंदर रूप आतिथ्यसम है ॥ १० ॥ यासों या जनायो कि जेती
दूरि देविनको विमान है तेतेई ऊंचे अवध बासिनके गृह हैं ॥ ११ ॥ १२ ॥
नृपनाथ (दशरथ) ॥ १३ ॥ १४ ॥ १५ ॥
मू०-सोरठा ॥ पुरजनलोगअपार, यहईसबजानतभये ॥
हमहींमिलेअगार, आयेप्रथमहमोरही ॥१६॥ मदनहराछंद ॥
सँगसीतालक्ष्मणश्रीरघुनन्दनमातनकेशुभपाइपरेसबदुःखह-
रे॥ आँसुनअन्हवायेभागनिआयेजीवनपायेअंकभरेअरुअंक-
धरे ॥ तेबदननिहारैंसरबसुवारैंदेहिंसबैसबहीनघनोअरुलेहिं-
घनो । तनमननसँभारैंयहैबिचारैंभागबडोयहहैअपनोकिधौं-
हैसपनो ॥ ॥ १७॥ स्वागताछन्द ॥ धामधामप्रतिहोति-
बधाई । लोकलोकतिनकीधुनिधाई ॥ देखिदेखिकपिअद्भुत-
लेखैं । जाहिंयत्रतित रामहिंदेखैं ॥ १८ ॥ दौरिदौरिकपिराव-