रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
DevanagariHindipublished269 पृष्ठ
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पखारेआप ॥ जातेगंगादिकनको, मिटतसकलसंताप ॥६१॥
पंकजवाटिकाछंद ॥ सूरजबचरणबिभीषणकेअति । आपुहिभ-
रतपखारिमहामति ॥ दुन्दुभिधुनिकरिकैबहुभेवनि । पुष्पबर-
षिहरषेदिविदेवनि ॥ ६२ ॥ दोहा ॥ पीछेदुरिशत्रुघ्नसुन, ल-
क्ष्मणधवायेपाइ ॥ चरणसौमित्रिपखारियो, अंगदादिकेआइ ॥
॥ ६३ ॥ तोमरछन्द ॥ शिरतेजटानिउतारि । अँगअंगराग
निधारि ॥ तनभूषिभूषणबस्त्र । कटिसोंकसेसबशस्त्र ॥ ६४॥
दोहा ॥ शिरतेपावनपादुका, लेकरिभरतबिचित्र ॥ चरणक-
मलतरहरिधरी, हँसिपहिरि जगमित्र ॥ ६५ ॥
टी०-यक्षपुरी कुबेरपुरी ॥ ५९ ॥ कोमल कहे चिकण ॥ ६० ॥ ६१ ॥ ६२ ॥
सौमित्रि शत्रुघ्न ॥ ६३ ॥ ६४ ॥ तरहरि कहे तरे ॥ ६५ ॥
इति श्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीराम