सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 229, कुल 269 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 229

मणिशीशकीजबपाइयो । बलवन्तनांविअनंतसागरतैसही
फिरिआइयो ॥ ५३ ॥ दशकंठदेखिबिभीषणैरनब्रह्मशक्तिच-
लाइयो । करिपीठित्योंशरणागतैतबआपवक्षसिलाइयो । एक
यामयामिनिमैंगयोहतिदुष्टपर्बतआनिकै । त्यहिकाललक्ष्मण
कोजिआइजिआइयोहम्जानिकै ॥ ५४ ॥ दोहा ॥ अपने
प्रभुकोआपनो, कियोहमारोकाज ॥ ऋषिऋक्षकहौहनुमंतसों,
भक्तनकोशिरताज ॥ ५५ ॥ चामरछन्द ॥ बीरधीरसाहसी
बलीजेबिक्रमीक्षमी । साधुसर्वदासुखीतपीजपीजेसंयमी ॥
भोगभागयोगयागवेगवन्तहँजिते । वायुपुत्ररामकाजवारिडारि
येतितै ॥५६॥ दोहा ॥ सीतापाईरिपुहत्यो, देख्योतुमअरुगेहु
रामायणजपसिद्धिको, कपिशिरटीकादेहु ॥ ५७ ॥ दोहा ॥
यहिबिधिकपिकुलगुणनको, कहतहुतेश्रीराम ॥ देख्योआश्रम
भरथको, केशवनन्दीग्राम ॥ ५८ ॥
टी०-अनंत कहे बडो ॥ ५३ ॥ दुष्टपदते कालनेमि जानो लक्ष्मणको जियाइ
हम कहे हमें जिआयो लक्ष्मणके मरे राम न जी हैं यह जानिकै ॥ ५४ ॥ सब
भक्तनके शिरताज एई हैं इति भावार्थः ॥ ५५ ॥ विक्रमी ( उपायी ) भाग कहे
(भाग्य) वतुप्रत्ययांतः भोगादिपांचौं शब्द जानौ राजकाजमें वायुपुत्र पर इत्यादिकन
(वीरादिकन) को सबन वारि डारियत है अर्थ जो रामकाज वायुपुत्र सँवारचो
है सो इन वीरादिकनको काहूको सँवारचो न सँवरतो ॥ ५६ ॥ रामायण कहे
रामकथा ॥ ५७ ॥ ५८ ॥
मू०-सुन्दरीछंद ॥ पुष्पकतेउतरेरघुनायक ॥ यक्षपुरीपठये
सुखदायक ॥ सोदरकोअवलोकितपोथलु।भूलिरह्योकपिरिक्ष-
सकोदलु ॥ ५९ ॥ कंचनकोअतिशुद्धसिंहासन । रामरच्यो
त्यहिऊपरआसन ॥ कोपरहीरनकोअतिकोमल । तामहँकुंकु-
मचन्दनकोजल ॥६०॥ दोहा ॥ चरणकमलश्रीरामके, भरत