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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 227, कुल 269 में से

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पृष्ठ 227

तशुभशीला॥ गवयगवाक्षगयंद । कपिकुलसबसुखकंद ॥४०॥
ऋषिवशिष्ठकोदेखि । जनमसफलकरिले खि ॥ रामपरेउठिपाय
लक्ष्मणसहितसुभाय ॥ ४१ ॥ दोहा ॥ लैसुग्रीवबिभीषणहिं,
करिकरिबिनयअनंत ॥ पाँयनपरेवशिष्ठके कबिकुलबुधिबलवं-
त ॥ ४२ ॥ श्रीराम-पद्धतिकाछंद ॥ सुनिजैवशिष्ठकुलइष्टदे-
व। इनकपिनायककेसकलभेव ॥ हमबूझतहैं विपदासमुद्र । इन
राखिलियोसंग्रामरुद्र ॥ ४३ ॥
टी०-जब भरत शत्रुघ्न सीताके पद लागे तब सीताजू आशिष दियो कि
शत्रुघ्न कहे शत्रुको मारौ ॥ ३८ ॥ ३९ ॥ ४० ॥ ४१ ॥ ४२ ॥ कपिनायक
(सुग्रीव) संग्राममें रुद्र कहे भयंकर ॥ ४३ ॥
मू०-सबआसमुद्रकीभूशोधाइ । तबदईजनकतनयाबताइ ॥
निजबाइभरतज्योंदुखहरण । अतिसमरअमरहत्यो कुंभक-
रण ॥ ४४ ॥ इनहरेविभीषणसकलशूल । मनमानतहौं शत्रुघ्न
तूल ॥ दशकंठहनतसबदेवसाखि । इनलियेएकहनुमंतराखि ॥
॥ ४५ ॥ तजितियसुतसोदरबंधुईश । मिलेहमहिंकायमनवच
ऋषीशं ॥ दईमीचुइन्द्रजितकीबताय । अरुमंत्रजपतराषणदे-
खाय ॥ ४६ ॥ तोटकछंद ॥ इनअंगदशत्रुअनेकहने । हम-
हेतुसहेदिनदुःखघने ॥ बहुरावणकोसिखहीदुखलै। पुनिआये
भलेसियभूषणलै ॥ ४७ ॥
टी०-शोधाइ कहे ढुंढाइके कुंभकर्णको तो रामचन्द्रही मारयो है परंतु कुंभ-
कर्णकी नासा, श्रवण, प्रथम सुग्रीव काटि लियो है ताही समयमें रामचन्द्र
मारयो है ताको मारिवो सुग्रीव ही पर स्थापित करत हैं अमर कहे काहूके मारिबे
लायक नहीं ॥ ४४ जब मेघनाद ब्रह्मपाशमें हनुमानको बांधि लैगयो है तब
रावण हनूमानके वध करिबेकी आज्ञा राक्षसनको दियो है तब विभीषण “दूत
मारिये न राज छोडि दीजै” ऐसे वचन कहि हनूमानको बचायो है सो कथा
चौदहें प्रकाशमें है ॥ ४५ ॥ सोदर [ कुंभकर्ण ] बंधु [ ज्ञातिसमूह ] ईश-