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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 220, कुल 269 में से

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पृष्ठ 220

. न्त्रिमातन समेत ॥ ५४ ॥ भरद्वाज ॥ कहकुशलकहाँतुम-
आदिदेव । सबजानत हौंसंसारभेव ॥ बिधिबिष्णुशंभुसविश-
शिउदार । सबपावकादिअंशावतार ॥ ५५ ॥ ब्रह्मादिसकल-
परमाणुअंत । तुम्हींहौरघुपतिअज अनंत ॥ अबसकलदान-
देपूजिविप्र । पुनिकरहुबिजयबैकुंठक्षिप्र ॥ ५६ ॥
इतिश्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिन्तामणिश्रीरामचन्द्र
चंद्रिकायामिंद्रजिद्विरचितायांरामस्यभरद्वाजाश्रमग-
मनंनामविंशःप्रकाशः॥ २० ॥
टी०-सत्य कहे सत्ययुग औषधि सम जे आठौं सिद्धि हैं तिनकं पर्वत हैं
जैसे पर्वतमें औषधी रहती हैं तैसे ऋषिमें आठौं सिद्धि रहती हैं कलाप ( समूह )
जगभूषण [ रामचंद्र ] ॥ ५२ ॥ प्रथम दूरसों करनसों प्रणाम कियो यामें निकट
जाइ दंडवत्प्रणाम करचौ ॥५३॥ पुनि कहे फिर ऋषिकी पूजा किये पर रामचंद्र
कुशलप्रश्न पूछत भये ॥ ५४ ॥ अंशावतार कहे तुम्हारे अंशावतार हैं ॥ ५५ ॥
“जालांतरगते भानौ यत्सूक्ष्मं दृश्यते रजः । तस्य षष्ठितमो भागः परमाणुः स
उच्यते ॥” बिजय कहे हमारे इहां भोजन करौ बैकुंठ ! रामचन्द्रको संबोधन
है ॥ “ विष्णुर्नारायणः कृष्णो वैकुंठो विष्टरश्रवाः इत्यमरः ” ॥ ५६ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादायजनजानकीप्रसादनिर्मितायां
रामभक्तिप्रकाशिकाया विशतितमः प्रकाशः ॥ २० ॥
मू०-दोहा ॥ इकइसयेंप्रकाशमें, कहऋषिदानविधान ॥
भरत मिलनकापिगुणनको, श्रीमुखआपबखान ॥ १ ॥ श्री-
राम-सोमराजीछंद ॥ कहादानदीजै। सुकैभांतिकीजै॥ जहांहो-
हिंजैसो । कहोविप्रतैसो ॥ २ ॥ भरद्वाज-दोहा ॥ सात्त्विक
तामसराजसी, दानतीनिबिधिजानि ॥ उत्तममध्यमअधम-
पुनि, केशवदासबखानि ॥ ३ ॥ चंचरी छंद ॥ पूजियेद्वि-
जआपनेकरनारिसंयुतजानिये । देवदेवहिथापिकैपुनिवेदमंत्र