रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविंशप्रकाशः २०. ( २०७ )
मू०-चञ्चरीछन्द ॥ सेतुसीतहिशोभनादरशाइपञ्चबटी
गये। पाँइलागि अगस्त्यकेपुनि अत्रियैतेविदाभये ॥ चित्रकूट
बिलोकिकै तबही प्रयागबिलोकियो । भरद्वाजबसैंजहाजिनते
नपावनहैबियो ॥ २९ ॥ राम-तारकछन्द ॥ चिलकैद्युति
सूक्ष्मशोभातिबारू । तनुद्वैजनुसेवतहैंसुरचारू ॥ प्रति
बिम्बतदीपदिपैजलमाहीं । जनुज्वालमुखीनके जालनहाहीं ॥
॥३०॥ जलकीद्युतिपीतसितासितसोहै। चहुँपातकघातकरैय-
ककोहै ॥ मदऐणमलैखसिकुंकमनीको । नृपभारतखण्डदियो
जनुटीको ॥ ३१ ॥
टी०-वियोग कहे दूसरो ॥ २९ ॥ तनु कहे सूक्ष्म ॥ ३० एक कहे केवल
जो बहुत पातक है ताके घात कहे नाश कैरैको कहे करिवेके अर्थ ऐणमद् जो
कस्तूरी है औ मलय [ चंदन ] औ कुंकुम [ केशरको ] घसिकै भारतखंडरूपी
जो नृप राजा है ताने मानों मारण तिलक दियो है जाको देखतही पातकनको
नाश होत है औरों राजा शत्रुक नाश करिवेके मारण तिलक शिरमें देते हैं
जाके देखतही शत्रु मरत हैं मारण मोहनोच्चाटनादि षटकर्मकी तिलकादि
क्रिया मंत्रशास्त्रमों प्रसिद्ध है भारतखंडवासिनको पातक दरिद्रादि पीडा करतहैं
सोइ शत्रुता जानौं ॥ ३१ ॥
मू०-लक्ष्मण-दंडक ॥ चतुरबदनपंचबदनषटबदनसहस
बदनहूसहसगतिगाईहै ॥ सातलोकसातद्वीपसातहूरसातल-
निगंगाजीकीशोभासबहीकोसुखदाई है। यमुनाकोजलरह्योफै-
लिकैप्रवाहपरे केशोदासबीचबीचगिराकीगोराई है। शोभान
शरीरपरकुंकुमविलेपनकोश्यामलदुकूलझीनझलकतिझाईहै॥
॥ ३२ ॥ सुग्रीव-चंद्रकला ॥ भवसागरकीजनुसेतुउजागर-
सुंदरता सिगरीसबकी । तिहुँदेवनकीद्युतिसीदरशैगतिशोषै-
त्रिदोषनके रसकी ॥ कहिकेशववेदत्रयीमतिसीपरितापत्रयी-