रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २०४ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
अरुणवर्ण प्रसिद्ध है ॥ १० ॥ आसावरी रागिनी अशोक वृक्षमें लग्ना कहे संलग्न
स्थित इति जो वनदेवता हैं ताके सम हैं अशोक वृक्षको अरुणवर्ण है ॥ ११॥
मू०-विजयछंद ॥ हेमणिदर्पणमेंप्रतिबिंबकिप्रीतिहियेअनु-
रक्तअभीता। पुंजप्रतापमेंकीरतिसीतपतेजनमेंमनौंसिद्धविनी-
ता। ज्योंरघुनाथतिहारियेभक्तिलसैउरकेशवकेशुभगीता। त्यों
अवलोकियआनँदकंदहुताशनमध्यसुवासनसीता ॥१२दोहा॥
इन्द्रबरुणयमसिद्धसब, धर्मसहितधनपाल ॥ ब्रह्मरुद्रलैदशरथ-
हि, आयगयेतेहिकाल ॥१३॥ अग्नि-बसंततिलकाछंद ॥ श्री
रामचन्द्रयहसंततशुद्धसीता। ब्रह्मादिदेवसबगावतशुभ्रगीता ॥
हूजैकृपालगहिजैजनकात्मजाया। योगीशईशतुम हौयहयोग-
माया ॥ १४ ॥ श्रीरामचन्द्रहँसिअंकलगाइलीन्हों। संसारसा-
क्षिशुभपावकआनिदीन्हों । देवानदुंदुभिबजायसुगीतगाये ।
त्रैलोक्यलोचनचकोरनिचित्रभाये ॥ १५ ॥
टी०-कि अनुरक्त कहे अनुरागी हृदयमें अभीता (निश्चला) प्रीति है विनीता
(उत्तमा) ॥१२॥१३॥ योगीश जे महादेव हैं तिनके ईश कहे स्वामी तुम हौ
अर्थ विष्णु हौ औ यह जो सीताहै सो योगमाया [लक्ष्मी]है पुनरुक्ति, 'नित्यं वक्षसि
योगं प्राप्नोतीति योगमाया लक्ष्मी:' अर्थ विष्णुके वक्षस्थलमें सदा युक्त रहति है
तासों योगमाया नाम है योगमाया कहि या जनायो कि यह तौ सदा तुम्हारे
वक्षस्थलमें प्राप्त रहति है कहूं रंचहू भिन्न नहीं होति तासों अदोष है ॥ १४ ॥
श्रीरामचन्द्र कह्यो है तासों त्रैलोक्य लोचन चकोर कह्यो ॥ १५ ॥
मू०-ब्रह्मा-दोधकछंद ॥ रामसदातुमअन्तर्यामी। लोकच-
तुर्दशकेअभिरामी॥निर्गुणएकतुम्हेंजगजानै। एकसदागुणवन्त
बखानै ॥ १६ ॥ ज्योतिजगैजगमध्यतिहारी। जाइकहीनसुनी
ननिहारी॥कोउकहैपरिमाननताको। आदिनअन्तरूपनजा-
को ॥१७॥ तारकछंद ॥ तुमहौगुणरूपगुणीतुमठाये । तुमए