रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २०२ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
मू०-राम-तारकछंद ॥ अबजाहुबिभीषणरावणलैकै । सक-
लत्रसबंधुक्रियासबकैकै ॥ जनसेवकसम्पतिकोशसँभारो ।
मयनंदिनिकेसिगरेदुखटारो ॥ ५५ ॥
इति श्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीरामचन्द्रचन्द्रिकाया-
मिन्द्रजिद्विरचितायांरावणबधवर्णनंनामैकोनविंशः प्रकाशः ॥१९॥
टी०-जनसेवक कहे सेवक जन अथवा जन [ बंधुजन ] सेवक [ चाकर ]
संपत्ति अश्व,गज, वस्त्रादि कोष खजाना ॥ ५५ ॥
इति श्रीमज्जगजननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्रसादनिर्मितायां
रामभक्तिप्रकाशिकाया मेकोनविंशः प्रकाशः ॥ १९ ॥
मू०-दोहा ॥ या बीसयेंप्रकाशमैं, सीतामिलनविशेषि ॥
ब्रह्मादिककीस्तुतिगमन, अवधपुरीकोलेषि ॥ १ ॥ प्रागवरणि
अरुवाटिका, भरद्वाजकीजानि ॥ ऋषिरघुनाथमिलापकहि,
पूजाकरिसुखमानि ॥ २ ॥ श्रीराम-तारकछंद ॥ जयजायकहो
हनुमंतहमारो । सुखदेवहुदीरघदुःखबिदारो ॥ सबभूषणभूषि
तकैशुभगीता । हमकोतुमबेगिदिखाबहुसीता ॥ ३ ॥ हनुमं-
तगयेतहँहींजहँसीता । तबजायकहीजयकीसबगीता ॥ पग
लागिकह्योजननीपगुधारो । मगचाहतहैरघुनाथतिहारो॥४॥
सिगरेतनभूषणभूषितकीने । धरिकैकैसुमावलिअंगनवीने ॥
द्विजदेवनिबंदिपढ़ीशुभगीता । तबपावकअंकचलीचढिसीता॥
॥ ५ ॥ भुजंगप्रयातछंद ॥ सबस्त्रासबैअंगशृंगारसोहैं । वि-
लोकेरमादेवदेवीबिमोहें ॥ पिताअंकज्योंधन्यकाशुभ्रगीता ।
लसैअग्निकेअंकत्योंशुद्धसीता ॥ ६ ॥
टी०-॥ १ ॥ २ ॥ ३ ॥ ४ ॥ सीताको बंदि कहे बंदना करि कै देवतन,
द्विज ब्राह्मण, समान शुभगीता कहे मंगलपाठ पढ्यौ अर्थ जैसे गमन समयमों