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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 206, कुल 269 में से

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पृष्ठ 206

( २०० ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
भेदि ॥ ४५ ॥ दंडकछंद ॥ सूरजमुसलनीलपट्टिशपरिघनल
जामवंतअसिहन्तूतोमरप्रहोरैहैं । परशासुखेनकुंतकेशरीगवय
शूलविभीषणगदागजभिंदिपालतारैहैं । मोगराद्विबिदतीरकट-
राकुमुदनेजाअंगदशिलागवाक्षविटपबिदारे हैं । अंकुशशरभ
चक्रदधिमुखशेषशक्तिबाणतिनरावणश्रीरामचंद्रमारैहैं ॥४६॥
दोहा ॥ द्वैभुजश्रीरघुनाथसों, बिरचेयुद्धबिलास, बाहुअठारह
यूथपनि, मारेकेशोदास ॥ ४७ ॥
टी०-रण अंगन कहे रणभूमिके मध्यमें अंगदको सब अंगनसों मुरझाइकै
कहे मूर्च्छित करिकै अर्थ सर्वांग शिथिल करिकै लक्ष कहे निशानकी गतियों
बुझाइकैकहे समुझाइकैकहे अर्थ निशानासम बेधिकै और और जो बानरगणसों
जब मुरै तौ न रामचन्द्रके सम्मुखै जुरचो अर्थ लरन लग्यो ॥ ४४ ॥ बीरबानि
कहे बीरस्वभावसों चर्म [ ढाल ] वर्म [ बखतर ] नर्म [ मर्मस्थल ] ॥ ४५ ॥
सूरज [ सुग्रीव ] शेष [ लक्ष्मण ] ॥ ४६ ॥ श्रीरामचन्द्रसों धनुर्बाणसों लरत है
तासों एक हाथ बाणमें एक धनुषमें लग्यो है तासों द्वै भुज जानों ॥ ४७ ॥
मू०-गंगोदकछंद ॥ युद्धजोईजहांभांतिजैसीकरैताहिता
हीदिशारोंकिराखैतहीं । आपनेअस्त्रलैशस्त्रकाढ़ैसबैताहिकेहू
कहूंघावलागैनहीं ॥ दौरिसौमित्रिलैबाणकोदंडज्योंखंडखंडी
ध्वजाधीरछत्रावली । शैलशृंगावलीछोड़िमानोंउडीएकहीबेर
कैहंसवंशावली ॥ ४८ ॥ त्रिभंगीछंद ॥ लक्ष्मणशुभलक्षण
बुद्धिबिचक्षणरावणसोंरिसछोडिदई । बहुबाणनिछंडैजेशिर
खंडैतेफिरखंडैशोभनई ॥ यद्यपिनरपंडितगुणगणमंडितरिपु
बलखंडितभूलिरहै । तजिमनबचकायकभूरसहायकरघुनाय-
कसोंबचनकहै ॥ ४९ ॥ ठाढ़ोरणगाजतकेहुनभाजततनमन
लाजतसबलायक । सुनिश्रीरघुनंदनमुनिजनबंदनदुष्टनिकंद-