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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 202, कुल 269 में से

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पृष्ठ 202

लंकमेंनिशंकअंकलंकनाथपाइयो ॥ २५ ॥ मत्तदंतिपंक्तिबा-
जिराजिछोरिकैदई । भांतिभांतिपक्षिगनिभाजिभाजिकैगई ॥
आसनेबिछावनेबितानतानतूरियो। यत्रतत्रछत्रचारुचौरंचारु-
चूरियो ॥ भुजंगप्रयातछन्द ॥ भगीदेखिकैशांकिलंकेशबाला ।
दुरीदौरिमंदोदरीचित्रशाला ॥ तहांदौरिगोबालिकोपूतफूल्यो ।
सबैचित्रकीपुत्रिकादेखिभूल्यो ॥ २६ ॥
टी०-सिंधुके पौरै धावतो कहे भागि जातो सुरपति ( इंद्र ) तिनके भर्त्ता
रक्षक औ मायाके विलासी जे विष्णु हैं तिनको हति कहे मारिकै तोकों लक्षि
जो लक्ष्मी हैं ताको दासी ल्यावतो यासों या जनायो कि रामचंद्र जो करत हैं
सो सब परशाहीके बलसों करत हैं यामें रामचंद्रकी शक्ति कछु नहीं है ।
॥ २४ ॥ प्रौढ जो धृष्टता है ताकी रूढ़ि कहे परिपक्वता ताको समूह कहे समूह
अर्थ अति धृष्ट ऐसा जो रावण है सो यज्ञ करिबेको गूढगेहमों जात भयो
मंदोदरीकी ऐसी कटु बातें सुनि कछू लाज न कियो तासों अतिधृष्ट कह्यो ॥
"समूढःपुंजिते भुग्ने इति मेदिनी" ॥ सो शुक्रके मंत्रको शोधि कहे शुद्धोच्चार
करिकै होमके अर्थ जब उद्यत भयो तब निशंक कहे शंकाते रहित है अंक
( हृदय ) जिनको ऐसे जे वायुपुत्रादि हैं ते धावत भये तब लंकनाथके जे अंक
कहे राजचिह्न हैं छत्र चामरादि तिन्हें पायो कहे देख्यो तब जान्यो कि याही
मंदिरमें रावण है है तालिये या प्रकारको उपद्रव करचो सो आगे कहत हैं।
॥ २५ ॥ तान ( डोरी ) ॥ २६ ॥
मू०-गहैदौरिजाकोतजैताकिताको । तजैजादिशाकोभ-
जैबामताको ॥ भलीकैनिहारीसबैचित्रसारी । लहैसुंदरीको
दरीकोबिहारी ॥ २७ ॥ तजैदृष्टिकोचित्रकी सृष्टिधन्या। हँसी-
एकताकोतहींदेवकन्या ॥ तहींहासहीदेवकन्यादिखाई । गही
शंकिकैलंकरानीबताई ॥ २८ ॥
टी०-फूल्यो कहे आनन्दित जा पुतरीको अंगद दौरिकै गहत है ताको
पुतरी जानि तजत है औ अंगद जा दिशाको तजत हैं ता दिशाको बाम कहे
मंदोदरी भजति है अथवा जा दिशाको अर्थ जा दिशाकी पुतरिनको अंगद गहत