रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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एकोनविंशप्रकाशः १९. (१९५)
कीबातनको प्रतिउत्तरआपुनहींकहिये हितकै कै। दीन्हीं है
लंकबिभीषणको अबदेहिंकहांतुमकोयहदै कै ॥ २२ ॥ मंदो-
दरी-मालिनीछंद ॥ तबसबकहिहारेरामकोदूतआयो । अब-
समुझिपरीजोपुत्रभैया जुझायो ॥ दशमुखमुखरंजीजैरामसोंहों
लरोंयों ॥ हरिहरसबहारेदेबिदुर्गालरीज्यों ॥ २३ ॥
टी०-रावण पूंछेउ कि केहिभांति तू रामचंद्रको देख्यो है ताको उत्तर यामें
दियो है कुंभहर औ कुंभकर्ण नाशहार सुग्रीव अकंप औ अक्षके अरि (हनुमान
शत्रु हैं सत्रहें प्रकाशमें कह्यो है कि ॥ जिते अकंपादि बलिष्ठ भारे संग्राममें
अंगद वीर मारे ॥ यामें विरोध होत है तासों या जनायो दूसरो अकंप रह्यो
ताको हनुमान मारयो है यथा वाल्मीकीये "स चतुर्दशभिर्वाणैर्निशितैर्देहदारणैः।
निर्बिभेद महावीरो हनुमंतमकंपनः । ततोवृक्षसमुत्पाट्य कृत्वा वेगमनुत्तमम् ।
शिरस्यभिजघानाशु राक्षसेन्द्रमकंपनम् । यथा पद्मपुराणे ॥ जघान हनुमा-
न्यूयो चतुर्थेहन्यकंपनम् ।" औ देवांतक औ नरांतकके अंतक [अंगद] औ मेघ
नाद औ मकराक्ष महोदरके प्राणहार (लक्ष्मण) यह अति निर्भय समय स्वरूप
जानौ ॥२१॥ बर कहे बलसों या प्रकार अवतार धरि धरि हम तीनों लोक बांटि
दियो अब तुमको यह जो परशा है ताको दै कै कहा कौन स्थान देहिं जामें
तुम रहौ परशुरामकी कथा कहि या जनायो कि जिन सहस्रार्जुन तुम्हें बांधि
राख्यो तिनको हम क्षणमें मारचो बामनकी कथा कहि या जनायो कि जिन
बलिकी दामिन पालसों तुम्हें गहि कै निकारि दीन्हों तिनको बांधिकै हम
पाताल पठायो तैसे तुमहूंको मारि बिभीषणको लंका देहैं ॥ २२ ॥ शुम्भ
निशुम्भादिके युद्धमें हरिहरादि सब हारि गये हैं तब दुर्गा लरिकै मार्यो है
यह कथा मार्कंडेयपुराणमें प्रसिद्ध है ॥ २३ ॥
मू०-रावण ॥ छलक रिपठयोतोपावतो जोकुठारै ॥ रघुपति
बपुराकोधावतोसिंधुपारै ॥ हतिसुरपतिभर्ताविष्णुमायावि-
लासी । सुनहिसुमुखितोकोल्यावतो लक्षिदासी ॥ २४ ॥
चामरछंद ॥ प्रौढरूढिकोसमूँढगूढगेहमेंगयो। शुक्रमंत्रशोधि
शोधिहोमकोजहींभयो ॥ वायुपुत्रबालिपुत्रजामवंतधाइयो ।