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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 269 में से

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पृष्ठ 200

( १९४ ) रामचंद्रिका-सटीक ।
मू०-दूत-संदेश ॥ सूर्पणखाजोबिरूपकरीतुमतातकियोह-
महूंदुखभारो। बारिधिबंधनकीन्होंहुतोतुममोसुतबंधनकीन्होंति
हारो॥होइजोहोनीसोहोइहीरहैनमिटैजियकोटिबिचारबिचारो।
दैभृगुनंदनकोपरशारघुनंदनसीतहिलैपगुधारो ॥ १८ ॥ दोहा ॥
प्रतिउत्तरदूतहिदियो, यहकहिश्रीरघुनाथ ॥ कहियोरावणहो
हिं जब, मंदोदरिकेसाथ ॥ १९ ॥ रावण-संयुताछंद ॥ कहिधौं
बिलंबकहाभयो । रघुनाथपैजबतूगयो ॥ कहिभांतितूअवलो-
कियो । कहुतोहिंउत्तरकादियो ॥ २० ॥
टी०-सीताको हरिकै तुमको दुख दीन्हों अथवा सीताहीको भारी दुख
दीन्हों परशुराम तौ धनुषबाण दियो है इहां रावण परशा माग्यो तहां या जान्यो
कि रावण सुन्यौ है कि रामचंद्र परशुरामको हथियार छोरि लीन्हों है औ
परशुरामको मुख्य हथियार परशाही है तासों परशा जान्यों ॥ १८ ॥ रामचंद्र
मंदोदरीकी बुद्धिकी स्तुति बिभीषणसों सुन्यौ है तालिये मंदोदरीके साथ
कह्यो है अर्थ जो मंदोदरी इन बचननको सुनि है तो समय बिचारि ग्लानि दै
रावणको लरिबेको पठाइ है अथवा जा मंदोदरी सहित रावण दुख पावै अथवा
कुंभकर्णादिके मरेसों रावण भीत है संधिके लिये दूत पठायो है ऐसा न होइ
कि आपही शरणमों चलि आवै जो हमको शरणागत रक्षकत्वधर्म प्रतिपालन
करि रावणको रक्षतही बनै तालिये जो मंदोदरी इन बचनको सुनि है तौ समय
बिचारि ग्लानि दै लरिबेहीके लिये पठाइ है संधिके लिये ना पठाइ है ॥१९॥२०॥
मू०-दूत-दंडक ॥ भूतलकेइंद्रभूमिबैठेहुतेरामचंद्रमारिच क-
नकमृगछालहिबिछायेजू । कुंभहरकुंभकर्णनाशाहरगोदशीश
चरणअकंपअक्षअरिरलायेजू । देवांतकनारांतकत्यौंमुसक्या
तबिभीषणबैनतनकानरूषबायेजू । मेघनादमकराक्षमहोदर-
प्राण हरबाणत्यौंबिलोकतपुरमसुखपायेजू ॥ २१ ॥ रामसंदे-
शबिजयछंद ॥ भूमिदईभुवदेवनकोभृगुनंदनभूपनसोंबरलैकै ।
वामन स्वर्गदियोमघवैसोबलीबलिबांधिपतालपैठैकै । संधि-