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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 198, कुल 269 में से

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पृष्ठ 198

( १९२ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।

मू०-महाराजलंकासदाराजकीजै । करौंयुद्धमेरीविदावेगि
कीजै ॥ हतौंरामस्योवंधुसुग्रीवमारौं । अयोध्याहिलैराजधानी-
सुधारौं ॥ १० ॥ बिभीषण-बसंततिलकाछंद ॥ कोदंडहाथ
रघुनाथसँभारिलीजै । भागेसबैसमरयूथपदृष्टिदीजै ॥ बेटाब-
लिष्ठखरकोमकराक्षआयो । संहारकालजनुकालकरालधायो ॥
॥ ११ ॥ सुग्रीवअंगदवलीहनुमंतरोंक्यो । रोंक्योरह्योनरघु-
बीरजहींबिलोक्यो ॥ मारचोबिभीषणगदाउरजोरठेली । का-
लीसमानभुजलक्ष्मणकंठमेली ॥ १२ ॥ गाढ़ेगहेप्रबलअंगनि-
अंगभारे । काटेकटैनबहुभांतिनकाटिहारे ॥ ब्रह्मादयोवरहि
अस्त्रनशस्त्रनलागै । लैहीचल्यौसमरसिंहहिजोरजागै ॥१३॥
गाढ़ांधकारदिविभूतललीलिलिन्हो । ग्रस्तास्तमानहुंशशीकहँ
राहुकीन्हो ॥ हाहादिशब्दसबलोगजहींपुकारे॥बाढेअशेषअँ-
गराक्षसकेबिदारे ॥ श्रीरामचन्द्रपगलागतचित्तहर्षे । देवाधि-
देवमिलिसिद्धनपुष्पवर्षे ॥ १४ ॥
टी०-सरस्वती उक्तार्थः ॥ काकूक्तिसों कहत हैं कि हे महाराज ! अब
लंकामें तुम सदा राज किया करौ महाराज पद कहि या जनायो कि मंत्रको
त्याग करि प्रभुतासों अपने मनहीं की बात करचो औ जैसे कुंभकर्णादिकनकी
सबकी बिदा कियो है तैसे मेरीहू बिदा करौ हौं युद्ध करौं जाइ औ तुम्हारी
आज्ञा के सदृश जैसे कुंभकर्णादिकन बंधु सहित राम औ सुग्रीवको मारि राज-
धानी अयोध्यामें सुधारचो है तैसे हौंहूं बंधु सहित राम औ सुग्रीवको मारिकै
राजधानी अयोध्यामें सुधारौं जैसे सब मरिगये हैं तैसे हौंहूं मरौं जाइ इति
व्यंग्यार्थः ॥ १० ॥ ११ ॥ विभीषण गदा मारचो ताको उरके जोरसों ठेलिकै
लक्ष्मणके कंठमें कालसर्पके समान भुजा मेलत भया ॥ १२ ॥ १३ ॥ १४ ॥
मू०-दोहा ॥ जूझतहीमकराक्षके, रावणअतिदुखपाइ । स-
त्त्वरश्रीरघुनाथपै, दियोवसीठपठाइ ॥ १५॥ सुंदरीछंद ॥ दूत-
हिदेखतहीरघुनायक । तापहँबोलिउठेसुखदायक ॥ रावणके