रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(१९०) रामचन्द्रिका-सटीक ।
भसोदरमेरे । कहिकौनकौनसुमिरौंगुणतेरे ॥ ३७ ॥ दोहा ॥
नींदभूखअरुप्यासको,जौनसाधतेबीर। सीतहिक्योंहमपावते,
सुनुलक्ष्मणरणधीर ॥ ३८ ॥
इतिश्रीमत्सकलो कलोचनचकोरचिन्तामणिश्रीरामचन्द्रच-
न्द्रिकायामिन्द्रजिद्विरिचितायामिन्द्रजिद्वधवर्णनं
नामाष्टादशः प्रकाशः ॥ १८ ॥
टी०-लक्ष्मणसों कैसे जाय भिरयो भय जो डरहै साही कहे हृदयसों हरयो कहे
दूरि भयो है जाके ऐसो जो गर्बादि करिके अंध कहे आंधरो अंधक नाम दैत्य है
सो जैसे भव जे महादेव हैं तिनसों युद्धमें जुरयो है अर्थ जैसे महादेवसों निर्भय
अंधक लरचो तैसे लक्ष्मणसों इन्द्रजीत लरतभयो ॥ ३४ ॥ एक एक कहे एक-
को परस्पर अनेक शर मारत हैं अर्थ लक्ष्मणको मारत हैं ते शर दुहूनके अंगनमें
मंदरमें जलबुंदसम परत हैं अर्थ अतिबलीनतासों कछू पीडा नहीं करत उद्धरचो
काढचो ॥ ३५ ॥ साथकी कहे जो अर्चाकी विधि संगमें लै आये रहें कहूं
शुभगाथकी पाठ है तौ शुभगाथ कहे लक्ष्मण ॥ ३६ ॥ ३७ ॥ ३८ ॥
इतिश्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकी जानिप्रसादायजनजानकी प्रसाद-
निर्मितायां रामभक्तिप्रकाशिकायामष्टादशः प्रकाशः ॥ १८ ॥
मू०-॥ दोहा ॥ उनईसयेंप्रकाशमें, रावणदुःखनिधान ॥
जूझैगोमकराक्षपुनि, हैहैदूतबिधान ॥ १ ॥ रावणजैहैगूढथल,
रावरलुटैबिशाल ॥ मंदोदरीकढोरिबो, अरुरावणकोकाल॥२॥
मोतनकछंद ॥ देख्योशिरअंजुलिमैंजबहीं । हाहाकरिभूमिप-
रचोतबहीं ॥ आयेसुतसोदरमंत्रि तबै । मंदोदरित्योंतियआई
सबै ॥ ३ ॥ कोलाहलमंदिरमांझभयो । मानौं प्रभुकोउडिमा-
णगयो ॥ रौवैदशकंठबिलापक रै। कोऊनकहूंतनधीरधरै ॥४॥
रावण-दंडक ॥ आजुआदित्यजलपवनपावकप्रबलचंदआ-
नंदमयतापजगकोहरौं । गानकिन्नरकरहुनृत्यगंधर्वकुलयक्ष
बिधिलक्षउरयक्षकद्मधरौं ॥ ब्रह्मरुद्रादिदेवेवत्रैलोककेराजको