रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
DevanagariHindipublished269 पृष्ठ
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पुष्पकीवृष्टि जैदेवगाजैं ॥ दशग्रीवशोकग्रस्त्योलोकहारी । भयो
लंकहीमध्यआतंकभारी॥२९॥ दोहा ॥ तबहींगयोनिकुंभिला,
होमहेतइन्द्रजीत ॥ कह्योतहांरघुनाथसों, मतोबिभीषणमीत-
॥ ३० ॥ चंचरीछंद ॥ जोरिअंजुलिकोबिभीषणरामसोंविन-
तीकरी । इंद्रजीतनिकुंभिलागयोहोमकोरिसजीभरी॥ सिद्धहो
मनहोइजौलगिईशतौलगिमारिये। सिद्धहोहिप्रसिद्धहैयहसर्व-
था हम हारिये ॥ ३१॥ दोहा॥ सोई बाहिहितैकिनर,वानरऋक्षजो
कोइ ॥ बारहवर्षक्षुधातृषा, निद्राजितेहोइ ॥ ३२ ॥ चंचरीछं
द॥ रामचन्द्रविदाकरयोतबवेगिलक्ष्मणवीरको। त्योंबिभीषण
जामवंतहिंसंगअंगदधीरको ॥ नील लैनलकेशरीहनुमंतअंतक
ज्योचले । वेगिजाइनिकुंभिलाथलयज्ञके सिगरेदले ॥ ३३ ॥
टी०-तालवृक्षादिपदतें आयुधै