रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८८ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
लकोकालहौंकुम्भकर्णौ।सुनौरामसंग्रामकोतोहिंबोलौं। बढ़यो
गर्वलंकाहिआयेसोखोलौं ॥ २४ ॥
टी०-लक्ष विधिको जो पक्ष कहे विरोध है तासों अर्थ बड़े विरोधसों
अथवा लक्ष विधिको जो पक्ष कहे बलहै तासों अर्थ बड़े बलसों इहां लक्ष
शब्द अधिकार्थमें है । "पक्षो मासार्थके पार्श्वगृहे साध्य विरोधयोः॥ केशादेःपरतो
वृंदे बले सखिसहाययोः" इतिमेदिनी ॥ २१ ॥ जे लक्षण ऋक्ष भयसों अन्तरि-
क्षको जात हैं तिन्हें बाहँके वात वायुसों खैंचिकै भषे खाइ डारचो ॥ २२ ॥
द्वै छन्दको अन्वय एक है खरै कहे खर राक्षसै सूधो निहारो अर्थ कपिनको
मूधो समझिकै मारन वेधन करचो सरस्वती उक्तार्थः ॥ मेरी ओर इनसम
शत्रु दृष्टिसों ना निहारो सूधो कहे कृपा दृष्टिसों निहारो अथवा मोंको सूधो कहे
शत्रुभावरहित आपनो दास निहारो सरस्वती उक्तार्थः ॥ लंकामें आयेते जो
तुम्हारे गर्व बढ़्यो है ताहि खोलौं कहे प्रसिद्ध करौं आशय कि जब मोको
मारिहौ तब तुम्हारो बलादिको जो गर्व है सो सब प्राणिनमें
प्रसिद्ध है है ॥ २३ ॥ २४ ॥
मू०-उब्योकेशरीकेशरीजोरछायो । बलीबालिकोपूतलैनी-
लधायो ॥ हनूमन्तसुग्रीवसाभसभागे । डसैडांससेअंगमातंग
लागे ॥ २५ ॥ दशग्रीवकोबंधुसुग्रीवपायो । चल्योलंकमेलैभ-
लेअंकलायो। हनूमन्तलातैंहत्योदेहभूल्यो। छुट्योकर्णनाशा-
हिलैइन्द्रफूल्यो॥ २६॥ सँभारचोधरीएकद्वैमेंमरालै। फिरचो
रामहींसामुहैंसोगदालै ॥ हनूमन्तजूपूंछसोंलाइलीन्हों। नजा-
न्योंकबैसेसिंधुमेंडारिदीन्हों ॥ २७ ॥
टी०-केशरी नामा वानर केशरी कहे सिंहके जोरसों छायो उठ्यो अथ
सिंह सम गर्जिकै शीघ्र चल्यो ॥ २५ ॥ इन्द्रसम सुग्रीव फूल्यो सुखी
भयो ॥ २६ ॥ २७ ॥
मू०-जहींकालकेकेतुसोंताललीनो । करयोरामजूहस्तपा-
दादिहीनो ॥ चल्योलोटतैंधाइबकैंधाचाली।उड़्योमुंडलैबाण
ज्योंमुंडमाली ॥ २८ ॥ तहींस्वर्गकेदुंदुभीदीहबाजैं । करयो