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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 269 में से

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पृष्ठ 193

दैके हेतुरूपी जो बचिवेको उपाय है तासों बचो काहेते बालि बली रहे तिन
बचिबेको उपाय न कियो ते न बचे मारेही गये चौथो तुमकों अर्थ पाछेके
छंदमें कह्यो है ॥ १६ ॥ आवन जान दियो अर्थ युद्धमंडलमें आवन दियो फेरि
युद्ध मंडलसों फिरि जानदियो स्त्रीहर्तादिक छह आततायी कहावत हैं यथा
भागवते ॥ "अग्निदो गरदश्चैव शस्त्रपाणिर्धनापहः॥ क्षेत्रदारापहश्चैव षडेते आतता-
यिनः"॥ आततायी ब्राह्मणहू होइ ताके वधसों ब्रह्मदोष नहीं है तासों ॥ १७ ॥
मू०-दोहा ॥ संधिकरोविग्रहकरो सीताकोतोदेह । गनौ न
पियदेहिनमें, पतिव्रताकीदेह ॥ १८ ॥ रावण-विजयाछंद ॥
हौंसतुछांडिमिलौँमृगलोचनिक्योंक्षमिहैंअपराधनये ॥ नारि
हरीसुतबांध्योतिहारेहौंकालिहिसोदरसाँगिहये । बामनमांग्यो
त्रि पैगधरादक्षिणाबलिचौदहलोकदये ॥ रंचकबैरहुतोहरिवंच
कबांधिपतालतऊपठये ॥ १९ ॥ दोहा ॥ देवरकुम्भकरन्नसों
हरिअरिसोंसुतजाइ । रावणसोंप्रभुकौनको,मंदोदरीडेराइ २०
टी०-पतिव्रता जे स्त्री हैं तिनकी देह स्वरूप देहिनमें न गनौँ ॥ १८ ॥ अप-
राधन ये कह्यो तासों बलिको प्राचीन बैर जानों अर्थ हिरण्यकशिपुके रंचक बैर
सों बलिको बांधि पाताल पठायो ॥ १९ ॥ २० ॥
मू०-चामरछन्द ॥ कम्भकर्णरावणैंप्रदक्षिणाहिंदैचल्यो ।
हाइहाइह्वैरह्योआकाशआशुहीहल्यो । मध्यक्षुद्रघंटिकाकिरीट
संगशोभनो । लक्षपक्षसोकलिन्द्रेइन्द्रकोचढ्योमनौँ ॥ २१ ॥
नाराचछंद ॥ उडैँदिशादिशाकपीशकोरिकोरिश्वासहीँ। चपैँच-
पेटपेटबाहुजानुजंघसोतहीँ।। लियेहैंऔरऐँचिएँचिबीरबाहुबात-
हीँ। भषेतेअन्तरिक्षरिक्षलक्षलक्षजातहीँ॥२२॥कुम्भकर्ण-भुजं-
गप्रयातछन्द ॥ नहौँताडुकाहौँसुबाहैनमानों । नहौंशंभुकोदंड
सांचीबखानों ॥ नहौँतालमालीखरैजाहिमारो । नहौंदूषणौसि-
न्धुसूथोनिहारो ॥२३॥सुरीआसुरीसुन्दरीभोगकर्णै । महाका-