रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
कि एक भाई बिभीषण समुझावन लाग्यौ ताको लात मारचो अब वैसेही कुंभ
कर्णसों रिस करत हैं ॥ १४ ॥ देव रावणको संबोधन है जो बात कुंभकर्ण
कहत है सो राजाके काजके हितको कहत.है ताहि प्रेमको पालिकै कहे हित
करिकै मानिये अर्थ सीताको दै कै रामचंद्रसों हित करौ काहेते काल जो
समय है ताकी जो कुचालि कहे प्रतिकूलता है तामें चालि कहे चाल युद्धा-
दि उत्कृष्ट कर्म रहित विचार युक्त निजहितसाधक कार्य कृत्यकै पूर्व नहीं चल्यो
को अब नाहीं चलत अर्थ जे पूर्व भये हैं तिन चल्यो है अब जे होत जात हैं
ते चलत हैं जब आपनो समय टेढो होत है तबशत्रु मिलनादि कार्य करिबो
संधिबो अनुचित नहीं है इति भावार्थः ॥ अथवा कालकी जो कुचालिं है ताकी
जो चलि कहे चालु है अर्थ जब आपनो काल प्रतिकूल भयो ता समयमों जो
कार्यसाधक उचित चाल है ॥ १५ ॥
मू०-विष्णुभाजिभाजिजातछोड़िदेवताअशेष । जामदग्न्य
देखिदेखिकैनकीननारिवेष ॥ ईशरामतेबचेबचेकबानरेशबा-
लि । कैंचलीनकोचलैनकालकीकुचालिचालि ॥ १६॥ बि-
जयाछंद । रामहिंचोरिनदीन्हींसियाजितकेदुखतोतपलीलि-
लियोहै । रामहिंमारनदीहोंसहोदररामहिंआवनजानदियोहै
॥ देहधरचौतुमहींलगिआजुलोंरामहिंकेपियज्यायेंजियोहै ॥
दूरिकर्योद्विजताद्विजदेवहरेहीहरेआततायीकियोहै ॥ १७ ॥
टी०-कालकी कुचालिमें चालु कै चली है सोकहत हैं देवदानवनके युद्धमें
देवतनके सहायको विष्णु जात हैं परन्तु जब जानत हैं कि दैत्यनको समय
सहायक है हमको कुटिल है हम इनसों ना जीति हैं तब यशकी सुधि भुलाइ
आपने प्राणनकी रक्षाके लिये भागि जात हैं या प्रकार कयोवारकी कथा पुराण-
नमें प्रसिद्ध है यासों या जनायो कि विष्णुसों बली कोऊ नहीं है तेऊ समय
बिचारि गौं साधि जात हैं औ जामदग्नि जे परशुराम हैं तिनको देखिकै कै क्षत्री
नारिको वेष नहीं धरचो यासों या जनायो कि जब परशुरामको समय रह्यो तब
बडे बडे क्षत्री समय विचारि नारिको वेष धरि जीव बचायो औ तेई परशुराम
ताही क्षत्रीवंशमें उत्पन्न जे रामचन्द्र हैं तिनको समय बली बिचारि आपनो
धनुषबाण दै हेतु करचो तासों हेईश ! रामचन्द्रको समय बली है सो सीताको