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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 187, कुल 269 में से

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पृष्ठ 187

[सप्तदशप्रकाशः १७. ( १८१ )]

हनुमानके सूर्योदय पर्यंत विलंबाइवेके लिये कपट तपस्वीकोरूप धरे मगमें बैठो
कार्यको विघ्नकारी कालनेमि राक्षस है ताको मारिकै एक यामै पहरै गये कहे
बीते औषधि पास गयो विशल्यौषधी कहे विशल्यकरनी औषधी ॥ ५१ ॥
मू०-लसैंऔषधीचारुभोव्योमचारी। कहैदेखियोंदेवदेवाधि-
कारी ॥ पुरीभौमकीसीलिये शीशराजै । महामंगलार्थीहिनूमंत
गाजै ॥ ५२ ॥ लगीशक्तिरामानुजेरामसाथी । जडेह्वैगयेज्यों
गिरैहेमहाथी ॥ तिन्हेंज्याइबेकोसुनोप्रेमपाली । चल्योज्वाल
मालीहिलेकीर्तिमाली॥५३॥ किधौं प्रातहीकालजीमेंबिचार्यो
चल्योअंशु लैंअंशुमालीसँहारचो॥ किधौंजातज्वालामुखीजोर
लीन्हें । महामृत्युजामैंमिटेहोमकीन्हें ॥ ५४ ॥
टी०-वा पर्वतमें ज्वलित औषधी सोहती हैं ताको लै हनुमान व्योमचारी आकाश
मगगामी भयो देव औ देवाधिकारी गंधर्वादि अथवा देवदेव जे इन्द्र हैं तिनके
अधिकारी जे देवता हैं अर्थ औषधिनकी रक्षामों जिनदेवतनको इंद्र अधिकार
दियो है अथवा देवदेव इंद्र औ मंत्रादिमें अधिकारी जे देवता हैं ते कहत हैं कि
महामंगल कल्याणके अर्थी जे हनुमान हैं ते भौम जे मंगल हैं तिनकी पुरीहीको
लिये जात हैं अनेक मंगल सम ज्वलित औषधी वृंद है मंगल पद श्लेष हैं कल्याण
औ भौमको नाम है ॥ ५२ ॥ तिन्हें कहे तिन लक्ष्मणको ज्याइवेको औषधिनके
ज्वालाकी माली कहे समूह हैं जामें सो ज्वालमाली कहावै ऐसा जो पर्वत है
ताहीको लैकै चल्यो है अर्थ ज्वलित हैं औषधिवृंद जामें ऐसो जो औषधिपर्वत
द्रोणाचल है ताहीको लिये जात हैं अथवा ज्वालकी है माली समूह जामें ऐसी जो
विशल्यकरनी औषधि है ताहीको लै चल्यो है अथवा ज्वालमाली जे अग्नि हैं
तिनको लै चल्यो है कीर्तिमाली हनूमानको विशेषण है ॥ ५३ ॥ औ प्रातहि
कहे सूर्योदय होतही लक्ष्मणको काल कहे मृत्यु जीमें बिचारचो है सो अंशुमाली
जे सूर्य हैं तिनको संहारि कहे मारिकै सूर्यके अंशु कहे किरण अथवा प्रभाव लिये
जात हैं जामें सूर्योदय ना होइ ॥ “अंशुः प्रभाकिरणयोरिति” मेदिनी ॥५४॥
मू०-बिनापत्रह्वैयत्रपाला शफूले।रमैंकोकिलासीभ्रमैंभौरभूले ॥
सदानंदरा मैंमहानंदकोलै । हनूमंतआयेबसंतैमनोलै ॥ ५५ ॥