रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलोकिसुगीता ॥ १५ ॥ गरुड-इंद्रवज्राछंद ॥ श्रीरामनारा-
यणैलोक कर्त्ता । ब्रह्मादिरुद्रादिकैदुःखहर्त्ता ॥ सीतेशमोको-
कछूदेहुशिक्षा । नान्हींबडीईशजोहोइइक्षा ॥ १६ ॥ राम ॥
कीबेहुतोकाजसबैसोकीन्हों । आयेइहांमोकंसुखदीन्हों ॥
पांलागिबैकुंठप्रभाविहारी। स्वर्लोकगोततक्षणविष्णुधारी॥१७॥
इंद्रवज्राछन्द ॥ धूम्राक्षआयोजनुदंडधारी।ताकोहनूमनभयेप्र-
हारी॥जितेअकंपादिबलिष्ठभारे।संग्राममें अंगदवीरमारे ॥१८॥
उपेंद्रवज्राछंद ॥ अकंपधूम्राक्षहिजानिजूस्यो । महोदरैरावण-
मंत्रबूझ्यो॥सदाहमोरतुममंत्रबादी।रैकहहोतैअतिही विषादी ॥
टी०-॥ १५ ॥ १६ ॥ १७ ॥ छंद उपजाति है ॥ १८ ॥ विषादी कहे
दुखी उदासीन इति ॥ १९ ॥
मू०-महोदर ॥ कहैजोकोऊहितवंतबानी । कहौसोतासों
अतिदुःखदानी ॥ गुनीनदावैबहुधाकुदावै ॥ सुधीतबैसाध-
तमौनभावै ॥ २० ॥ कहोशुकाचार्य्यसुहौंकहौजूं । सदातु-
म्हारोहितसंग्रहौजूं ॥ नृपालभूमौविविधचारिजानों । सुनो
महाराजसबैबखानों ॥ २१ ॥ भुजंगप्रयातछंद ॥ यहैलो-
कएकै सदासाधिजानै । बलीबैनज्योंआपुहीईशमानै ॥
करैसाधनाएकपरलोकहीको । हरिश्चन्द्रजैसेगयेदैमहीको
॥ २२ ॥ दुहूंलोककोएकसाधैंसयाने । बिदेहीनज्योंवेद-
बानीबखाने ॥ नटैलोकदोऊहठीएकऐसे । त्रिशंकैहँसैंज्यों-
भलेऊअनैसे ॥ २३ ॥ दोहा ॥ चहूंराजकोमैंकहूँ, तुमसों
राजचरित्र ॥ रुचैसोकीजैचित्तमें, चिंतहुमित्र अमित्र
॥ २४ ॥ चारिभांतिमंत्रीकहे, चारिभांतिकेमंत्र ॥ मोहिंसु-
नायोशुकजू, सोधिसोधिसबतंत्र ॥ २५ ॥