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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 269 में से

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पृष्ठ 177

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षोडशप्रकाशः १६. ( १७१ )
ताकी आली कहे समूह अर्थ जिनमें अनि अग्नि है ऐसे बाण लिये हैं अथवा र
कहे तीक्ष्ण जे बाण हैं तिनकी आली कहे पंक्तिसमूह इनि तिनको लिये हैं सो
रामचंद्रके संग्राममों मोसों कहे हम ऐसो प्राणी कैसे जुरै अर्थ हम उनके युद्ध
करिवे लायक नहीं हैं। 'रस्तीक्ष्णे दहने इत्यभिधानचिंतामणिः।' 'पुस्यालिविश-
दाशये त्रिषु स्त्रियां पश्यायां सेतौ पंक्तौ च कीर्तिता' इत्यभिधान चिंतामणिः॥२६॥
वित्त धन ॥ २७॥
मू०-रावण-भुजंगप्रयातछंद॥ डरैगायविप्रैअनाथैजोभाजै।
परद्रव्यछोडैपरस्त्रीहिलाजै॥ परद्रोहजासों नहोवैग्तीको। मुकैसै
लरैवेषकीन्हैयतीको॥२८॥ दोहा॥ गेंदकरेउमैंखेलको, हरगिरि
केशौदास। शीशचढायेआपने, कमलसमानसहास॥ २९ ॥
टी०-जे रामचन्द्र गाय औ विप्रको डगत हैं अथ अतिदीन गाय औ विप्र
तिनहूँको डरात हैं तासों अति कादरहैं औ अनाथ जे प्राणी हैं जिनकी नाथ
कोऊ नहीं है ताहीको भजै कहे सेवन करत हैं अर्थ ताहीसों संग करत हैं यामों या
जनायो कि भयसों रंचकहूँ परद्रव्य नहीं लै सकत हमारो राज्य कैसे लें हैं औ पर
स्त्रीको लजातहैं यासों या जनायो कि जे स्त्रीको लजात हैं ते वीरनसों कहा
धृष्टता करि हैं औ जिनमों परद्रोह कबहूं रत्तीहूभरीनाहीं हैं सकत आशय कि शत्रुता
करते डगतहैं औ ताहूपर वेष यती तपस्वीकी घरेहैं अर्थ वेषहू वीरको नहीं है सो
मोसों कैसे लरि हैं सरस्वती उक्तार्थः-मर्यादा पुरुषोत्तम हैं तासों ब्रह्मशाप गोशापको
डेरातहैं भृगु लातहू मारचो ताहू पर कछू ना करचो अनाथ जे प्रह्लाद सम्भादि हैं
तिनके निकट ही रहे जा भांति कष्ट भयो ताही विधि निकट वर्गी...
औ परद्रव्य परस्त्री हरनमें पाप होत है तासों त्याग करत हैं औ परद्रोह कासों
रत्तीहूभरि नाहीं होत यासों समदर्शी जानां सबको समान हैं तिनसों हम कैसे
लरैं अर्थ वै ईश्वर हैं वेष कहे रूप मात्र यती को कीन्हे हैं ॥ २८॥२९॥
मू०-अंगद-दंडक ॥ जैसोतुमकहतउठायोएकगिरिवरऐसे
कोटिकपिनकेबालकउठावहीं। काटेजोकहतशीशकाटतघनेरे
घाघभगरकेखेलेकहाभटपदपावहीं ॥ जीतयोजोसुरेशरणशा-
पऋषिनारिहीकोसमुझहुहमद्विजनातेसमुझावहीं । गहौराम
पायँसुख पाइकैरंतपी तप सीताजूको देहु देव दुंदुभी बजा-