सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 269 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 176

( १७० ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
चढ्यो औ गर्वपर चढ्यो अर्थ राज्याभिमान भयो औ जेहि कहे जाते अर्थ जाकी
कृपासों व्योममें विमानन पर चढ्योई रह्यो अर्थ पुष्पकादि विमानन पर चढ्यों
आकाश आकाश फिरत रह्यो केशव कहत हैं कि सो जो वह प्रभु रामचन्द्र हैं
ताकों कबहूं न पढ्यो अर्थ राम नाम कबहूं न जप्यो सो हे मूढ ! अब चिताहू
पर चढ्यो चाहत हैं ताहू पर तेरी चित्त चढि रह्यो हैं कहे मत्त है रह्यो है तामें तू
चेतत नहीं अर्थ चेत नहीं करतो चिताहूमें चढ्यो चाहत है यह कहि या जनायो
कि रामचन्द्र तोहि शीघ्रही मारि हैं तासों उनके शरणमों जाइकै आपनो
भलो करु ॥ २५ ॥
मू०-रावण-भुजंगप्रयातछंद ॥ निकारयोजोमैं पालियोरा-
जजाको । दियोकाढिकैजूकहात्रासताको ॥ लियेबानराली-
कहौंबाततोसों। सोकैसेलरैरामसंग्राममोसों ॥ २६ ॥ अंगद-
बिजयछन्द ॥ हाथीनसाथीन