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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 269 में से

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पृष्ठ 175

षोडशप्रकाशः १६. ( १६९ )

टी०-तुम्हारी जो यह नूतन कहे नवीन दूतविधि कहे दूतता तोर फोर है ताको
कबहूं न उरमें आनि हैं पाइ है ॥ २० ॥ २१ ॥ नराच वान निगैंविहारी राव-
णको संबोधन है अथवा शिवा औ श्वान औ और जे निगैविहारी काकादि हैं ते
तिहारी शिखा गहे तिहारे शिरको लिये फिरेंगे ॥ २२ ॥
मू०-रावण भुजंगप्रयातछन्द ॥ महामीचुदासीसदापाईँ-
धोवै । प्रतीहारहै कै कृपाशूरसोवै ॥ क्षपानाथलीनहेरहैछत्र-
जाको । करैगो कहाशत्रुसुग्रीवताको ॥ २३ ॥ सकामेघ-
माला शिखीपाककारी । करैकोतवालीमहादंडधारी ॥ पढ़ैवेद
ब्रह्मासदाद्वारजाके । कहाबापुरोशत्रुसुग्रीवताके ॥ २४ ॥
टी०-अंगदकहो कि श्रीराम बाण धरिकै तुमको मारिहैं ताको उत्तर रावण
दियो कि महामीचुजो है सो मेरे सदा पाईं धोइवेके अर्थ दासीहै याते अति
न्यूनदासी जनायो एकशत एक मीचु हैं तामें शत अकालमीचु हैं एक महामीचु
है शतमीचु उपायोंसों दूरि होती हैं एक महामीचु काहू उपायोंसों नहीं मिटति ।
यथा भावप्रकाशे “एकोत्तरं मृत्युशतमथर्वाणः प्रयच्छते । तत्रैकः कालसंयुक्तः
शेषास्त्वागंतवः स्मृताः” । यामों या जनायो कि युद्धादिमें मरिबो तो अकाल-
मृत्यु है सो मेरे समीप कैसे आइ है ॥ २३ ॥ सका कहे सक्का पाककारी रसों-
ईदार ॥ २४ ॥
मू०-अंगद-विजयछन्द ॥ पेटचढ़्योपलनापलिकाचढ़िपा-
लकिहूचढ़िमोहमढ़योरे । चौकचढ़्योचित्रसारीचढ़्योगजवा-
जिचढ़योगढ़गर्बचढ़योरे । व्योमविमानचढ़्योईसहाकलिनि-
वसोंकबहूंनपढ़योरे । चेततनाहींरह्योचढ़िचित्तसोंचाहतमूढ़
चिताहूचढ़योरे ॥ २५ ॥
टी०-प्रथमहिं पेटमें चढ्यो कहे गर्भमें आयो जब जन्म भयो तब पलनामें
चढिकै झूल्यो कछू और बडो भयो पलिका जो खट्टा है तामें चढि सोवन
लाग्यो औ जब व्याह भयो तब पालकीमें चढि व्याहने चल्यो तब मोह जो
माया है तामें मढ्यो कहे युक्त भयो फेरि पाणिग्रहणमें चौकमैं चढ्यो फेरि
स्त्रीके संग चित्रसारीमें चढ्यो फेरि राजा हैकै गजवाजिमें चढ्यो औ गढपर