रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंषोडशप्रकाशः १६. ( १६७ )
जीत्यौ औ वै हमपर चढ़ि आये हैं हम वपुगसम कछु करि नहीं सकत अथवा वपुरा
समुझि हमपर चढ़िआये हैं ॥ १४ ॥
मू०-अंगद ॥ चेटकसोंधनुभंगकियोप्रभुरावरेकोअतिजीर-
नहो । बाणसमेतरहपचिकैतुमजासपैंनतज्योथलुहो ॥ बाण
सुकौनबलीवालिकेसूतवैबलिबावनबांधिलियो। ओइसोतौजिन
कीचिरचेरिननाचनचाइकैकैछांडिदियो ॥१५॥ रावण ॥ नील
सुखेनहनू उनकेनलऔरसबैकपिपुंजतिहारे । आठहु आठदिशा
बलिदैअपनोपदुलैपितुजालगिमारे ॥ तोसेसपूतहिजाइकैकैवालि
अपूतनकीपदवीपगुधारे । अंगदसंगलेमैरो सबैदलआजुहिक्यों
नहैनवपमारे ॥ १६ ॥ दोहा ॥ जोसुतअपनेबापको, बैरनलेइ
प्रकाश । तासोंजीवतहीमरचो, लोगकहैंतजि त्रास ॥ १७॥
टी०-कवित्तमें उक्ति मेघनादकी है औ जवाब रावणको अंगद दियो ता
जवाबहीसों या जानो कि रामचन्द्र सिंधुबंधनादि मम शंभु धनुषभंग चेटकहीसों
कियो है यह बात रावण कह्यो है अंगद कहत हैं कि प्रभु जे रामचन्द्र हैं तिन
चेटकसों धनुष भंग कीन्हौं औ तुम कहत हौ कि जीरण कहे पुरानो रहै परन्तु
तुमको पुरानो तो रहै पै बाणसमेत तुम पश्रम करि पचिकै कहे थकि कै
रहिगये ताहूपर थलहू ना छांडयो अर्थ रंच ना उठयों ॥ १५ ॥ नील, सुखेने,
हनूमान औ सुग्रीव औ राम लक्ष्मण औ विभीषण ये जे आठ हैं [अस्पष्ट]
नील सुखेनादि चारि वानर उनके सुग्रीवके हैं ते वालिके भयसों भागि रहे तब
संगरहे यासों या जनायो कि जो रामचन्द्र आज्ञाहूं करें औ तिनहीकि मोहसों तिनहीं
वै तिहारो राज्य न दियो चाहैं तौ सब वानर तेरेई साथी है हैं तासों तू आठहूं
आठ दिशा बलिद जे रामचन्द्र हैं आठ दिशनके आठ जो इन्द्रादि दिक्पाल हैं ते
हैं बलिदकहे भेंटक दाता जिनके अर्थ इन्द्रादि दिक्पाल जिनकर भेंट देतहैं तिनहीं
सों आपनो पद जो राज्यहै ताको ले जाके लिये सुग्रीव तिहारे पितुको मारिडारचो
है काहेते राज्य तिहारे पिताको है रामचन्द्र मर्यादापुरुषोत्तम हैं जो तू कहिहै तौ
तोकों विशेष देहं । “बलिदैत्योपहारयोरित्यभिधानचिन्तामणिः” ॥ बापमारे कहे
जो तेरे बापको मारचो है ॥ १६ ॥ १७ ॥