रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतश्यामलवेष ॥ ॥ २ ॥ प्रतीहारनाराचछंद ॥ पढोबिरंचि
मोनवेदजीवसोरछंडिरे । कुबेरबेरकैकहीनयक्षभीरमंडिरे ।
दिनेशजाइदूरिबैठुनारदादिसंगहीं । नबोलुचंदमंदबुद्धिइंद्रकीसभानहीं ॥ ३ ॥ चित्रपदाछंद ॥ अंगदयोसूनिबानी ।
चित्तमहारिसआनी ॥ ठेलिकै लोगअनेक । जाइसभामहँ-
बैठे ॥ ४ ॥ चित्रपदाछंद ॥ कौनहोपठयेसोकौनैइहांत तुम्हैं-
कहकामहै ॥ अंगद ॥ जातिबानरलंकनायक दूतअंगदनाम
है ॥ रावण ॥ कौनहैवहबांधिकैहमदेहपूछिसबैदही । लंकजारि-
सँहारिअक्षगयोसोबातवृथाकही ॥ ५ ॥
टी०-॥ १ ॥ आसनमें गत कहे बैठो ॥ २ ॥ रावणके सभाभवनमें जाइ
अंगद ऐसे कौतुक देखत भये प्रतीहार या प्रकारके अनादर पूर्वक बचन
ब्रह्मादिसों कहत हैं हे कुबेर ! तुमसों कैयो बार कह्यो कि तुम यक्षनकी भीरको
न मंडौ अर्थ यक्षनकी भीरको संग लै इहां न आयो करो सो तुम आइवां करत हौ ३॥
॥ ४ ॥ लंकनायक बिभीषण॥ ५ ॥
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