रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचदशप्रकाशः १५. (१६१)
मू०-दण्डक॥कुंतलललितनीलभ्रुकुटीधनुषनैनकुमुदकटा-
क्षबाणसबलसदाईहै॥ सुग्रीवसहिततारअंगदादिभूषणरुमध्य
देशकेशरीसुगजगतिभाईहै॥ विग्रहानुकूलसबलक्षलक्षऋक्षब-
लक्षऋक्षराजमुखीमुखकेशोदासगाईहै। रामचन्द्रजूकीचमूराज्य
श्रीविभीषणकीरावणकीमीचुदरकूचचलिआई है ॥ ४० ॥
टी०-रामचन्द्र चमू कैसीहै कि कुंतल औ ललित औ नील औ भ्रुकुटी औ
धनुष औ कुमुद औ कटाक्ष औ बाण औ सबलई जे वानर हैं ते सदा हैं जामें
अथवा बाण पर्यंत इन नामन करिकै युक्त औ सदा सबल कहे बलवान ऐसे
जे वानर ऋक्ष हैं ते हैं जामें औ सुग्रीव सहित है औ तार नामा जे वानरहैं तिन
सहितहै औ अंगदादिक जे भूषण कहे सेनानायक हैं तिनसों युक्त है औ मध्य
देशनामा औ केशरीनामा औ सुगज नामा जे वानरहैं तिनकी गति भाई कहे
नीकी है जामें औ विग्रहनामा औ अनुकूलनामा औ ऋक्षराज मुख कहे ऋक्षराज
जे जाम्बवंत हैं ते हैं मुख कहे मुखिया जामें ऐसो लक्ष लक्ष कहे अनेक लक्ष
ऋक्षन ऋक्षनकोहै बल सैन्य जामें विभीषणकी राज्यश्री कैसी है कि कुंतल
जे केश हैं ते हैं ललित कहे सुंदर औ नील कहे श्याम जाके औ भ्रुकुटी धनुष
सम जाकी औ नयन हैं कुमुद कहे कमलसम जाके औ कटाक्ष हैं बाणसम जाके
औ सबल कहे सुंदरता सहित सदा है अर्थ जाकी छवि काहू समयमों म्लानि
नहीं होति ॥ "बलं गंधरसे रूपे-इति मेदिनी"॥ औ सुष्ठु जो ग्रीवा है सो सहितहै
तार कहे विमल मुक्तनसों अर्थ मोतिनकी माला पहिरे है॥ "तारो निर्मलमौक्तिके
मुक्ताशुद्धावबुध्नादे-इत्यभिधानचिंतामणिः"॥ औ अंगद जो विजायठ हैं
तेहि आदिदै जे भूषण हैं तिनसों युक्त है औ मध्यदेश जो कटि है सो है केशरी
कहे सिंहको ऐसो जाको औ सुष्ठु जो गज है अर्थ जो अति ललित चाल चलत
है ताकी ऐसी गति है भाई कहे नीकी जाकी औ विग्रह कहे शरीर है अनुकूल
कहे यथोचित सब कहे पूर्ण अर्थ जैसो जौन अंग चाहिये तौन अंग तैसोई है
अथवा अनुकूल कहे हित है सबको अर्थ जे देखत हैं ताको मन वश है जात
है अथवा अनुकूल कहे व्याधि रहित 'गात्रं वपुः संहननं शरीरं वर्ष्म विग्रहः
इत्यमरः'॥ औ लक्ष लक्ष जे ऋक्ष नक्षत्र हैं गन कहे जो बल सौंदर्य है तेहि
सहित जो ऋक्षराजचन्द्रमा है ताते सदृशहै मुख जाको अर्थ जब अनेक लक्ष
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