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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 269 में से

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पृष्ठ 164

( १५८ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
निर्घृण कहे निर्दय ॥ 'कारुण्यं करुणा घृणा इत्यमरः' ॥ २१ ॥ चार कहे
दूत ॥ २१ ॥
मू०-नील० ॥ सांचेहुजोयहहैशरणागत । राखियराजि-
वलोचनमोमत ॥ भीतनराखियतौअतिपातक । होइजोमा-
तुपिता कुलघातक ॥ २२ ॥ हनूमान-हरीलीलाछंद ॥
जानौबिभीषणनराकसरामराज । प्रह्लादनारदबिशारद-
बुद्धिसाज ॥ सुग्रीवनीलनलअंगदजाम्बवाँ । राजाधिराज-
बलिराजसमानसंत ॥ २३ ॥ दोहा ॥ कहननपाई बातसब-
हनूमंतगुणधाम ॥ कह्यौबिभीषण जुही, सबन सुनाइ-
प्रणाम ॥ २४ ॥ सवैया ॥ दयालुकहावतकेशवहौं
अतिदीनदशागह्यौगाढो । रावण अघओघमैंकेशवबूडतहौं
वरहींगहिकाढो । ज्योंगज ग्राहकीकीरतित्योंहींबिभी-
षणकोयशबाढो । आरतबंधु सुनो किन आरतहौं तौ-
पुकारतठाढो ॥ २५ ॥
टी०-जो माता औ पिता औ घात कहूं होय औ भीत है कै आवै
ताको न राखौ तौ बडो पातक जो माता पिता औ कुल घातकको
पातक होत है सोई पातक जो ना राखै ताको होत है ॥ २२ ॥ प्रह्लाद
औ नारदके समान हैं बिशा धृष्ट परिपक्व इति बुद्धिकी साज जिनकी
अर्थ प्रह्लाद नारद सम तु क है ॥ “विशारदः पंडिते च धृष्टे इतिमे-
दिनी” ॥ २३ ॥ २४ कहे बाढो ॥ २५ ॥
मू०-केशवउ सह्यौदुःखपैदासनदेखिसकेनदुखारे ।
जाकोभयोजेहि जहँदुखत्योंहींतहांतिहिभाँतिपधारे ॥
मोरियबारअबु कहूँनाहिंतुकाहुकेदोषबिचारे । बूडतहौँम-
हामोहसमुद्र वतकाहेनराखनहारे ॥ २६ ॥ हरीलीला-
छंद ॥ श्री चंद्रअतिआरतवंतजानि । लीन्होंबोलायशर-
णागतसुनि ॥ लंकेशआउचिरजीवहिलंकधाम । राजा-