रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचदशप्रकाशः १५. ( १५५ )
मू०-प्रहस्त ॥ वामदेवतुमकोवरदीन्हो । लोकलोकसिग-
रेशकीन्हो ॥ इन्द्रजीतसुतसोजगमोहै। रामदेवनरवानरको-
है॥४॥ मृत्युपाशभुजजोरनितोरे । कालदंडतुमसोंकरजोरे ॥
कुंभकर्णसमसोदरजाके । औरकौनमनआवतताके ॥ ५ ॥
कुंभकर्ण-चतुष्पदी० ॥ आपुनसबजानतकह्यौनमानतकीजै-
जोमनभावै।सीतातुमआनीमीचुनजानीआनकिमंग्रबतावै॥ जे
हिबरजगजीत्यौसर्वअतीत्यौतासोंकहाबसाई । अतिभूलिगई
तबशोचकरतबजबशिरऊपरआई ॥ ६ ॥ मंदोदरी-विजय-
छंद॥रामकिवामजोआनीचोराइसोलंकमेंमीचुकीबेलिवईजू ।
क्योंरणजीतहुगेतिनसोंजिनकीधनुरेखननांधिगईजू ॥ बीसबि-
सेबलवन्तहुतेजोहुतीदृगकेशवरूपपरईजू।तोरिशरासनशंकरको
पियसीयस्वयंवरक्यौंनलईजू ॥ ७ ॥
टी०-वामदेव महादेव सरस्वती उक्तार्थः ॥ रामचन्द्र देव हैं नर औ वानर
को हैं इहां देव पदते ईश्वर जानौ अर्थ रामचन्द्र ईश्वर हैं औ सुग्रीवादि
वानर सब देवसैन्य हैं ॥ ४ ॥ ५ ॥ बर कहे बल अर्थ तपोबल
अथवा शिवादिके वरमों सब अतीत्यौ कहे बीतो तासों कहा बसाइ कहे
जोर चलै अर्थ विनाशको समय आयो सोई तुमसों ऐसे सीयाहरणादि कार्य
करायो है अथवा जेहि शिव औ ब्रह्माके वरसों जगको जीत्यौ सो वरदान
सब वीतो काहेते कि यह वर दीन रह्यो कि नर वानरनको छोडिकै औरसों
तुमको भय न है है सो और औ वानर ही लरिबेको आवत हैं सो वानरको
प्रभाव तौ कछू यामें चलि है नहीं सो तुमको तब कहे सीयाहरणादि
समयमों यह सुधि भूलि गई कि हमको नर वानरसौं भय है जब शिर ऊपर
आई है तब शोच करत हौ तौ तासों कहा वसाइ कहे जोर चलै अर्थ अब
मृत्युते रक्षाको कछू उपाय नहीं है ॥ ६ ॥ जो तुम्हारो दृगनमों सीतारूप जो
सौंदर्य्य है ता करिकै रई कहे वसी रहे ॥ ७ ॥
मू०-बालिबली नबच्यो बरखोरिहिक्यौं बचिहौ तुम आपनिखो-
रहि।जालगिक्षीरसमुद्रमथ्यौ कहिकै सैन बांधिहैं वारिधितोरहि॥