रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगये कहे बीते आशुही कहे थोरेही दिन मों झूठी है है अवधि दिन बीते रावण
हमको मारि डारि है तब सब कहि हैं कि साक्षात् स्त्री सीता की रक्षा रावण
सों न करवा तो असंबंधी प्रह्लाद की रक्षा कहा करचो है है इति भावार्थः ॥
जे वनकृत अवधि दिन तेरहें प्रकाश में कह्यो है । अवधि दई द्वै मासकी ।
सो जानो अथवा मास दिन कहे एक महीना गये कहे बीते अर्थ एक महीना
के बाद हम प्राण छोड़िदेहूँ वाल्मीकीयमें कह्यो है । “इदंब्रूयाश्चमेनाथं शूरं-
रामं पुनःपुनः । जीवितं धारयिष्यामि मासं दशरथात्मजम् । ऊर्ध्वं मासन्रंजीवेयं
सत्येनाहं ब्रवीमि ते” ॥ २३ ॥ “राजसुता यक मंत्र सुनो अब । चाहत हौं भुव
भार हरचो सब ॥ पावकमें निज देहहि राखहु । छायाशरीर मृगै अभिलाषहु ॥”
या प्रकार राक्षसन को मारि भुवभार हरिवो कह्यो रहै सो बात को या अनल-
में जरन न पावै औ शोकरूपी समुद्र में डूबन न पावे ता बात की रक्षा तुम
को नीके प्रकार सों करिवे है ॥ २४ ॥
मू०-राम-दंडक ॥ सांचोएकनामहरिलीन्हेसबदुःखहरिऔ-
रनामपरिहरिनरहरिठायेहौ । बानरनहींहौतुममेरेबाणरोषसम
बलीमुखशूरबलीमुखनिजगायेहौ।शाखामृगनाहीबुद्धिबलन-
केशाखामृगकैधौंवेदशाखामृगकेशवकोभायेहो । साधुहनुमन्त
बलवंतयशवंततुमगयेएककाजको अनेककरिआयेहौ ॥ २५॥
हनूमान-तोमरछंद ॥ गइमुद्रिकालैपार । मनिमोहिंल्याईवार॥
कहकरचोमैबलरंक । अतिमृतकजारीलंक ॥ २६ ॥
टी०-सीताको संदेश दै कै हमारो सब दुःख तुम हरिलीन्हां ताते हरि यह जो
तुम्हारो नामहै सो सांचो है 'हरतिदुःख मितिहरिः, । अर्थ जो दुःखको हरै सो
हरि कहावै सो तुम नरहरि कहे नृसिंह हौ और नाम जो नर है ताको परिहरि कहे
छोड़ि कै हरि एते नाम सों ठाये कहे युक्त हौ यासों या जनायो कि प्रह्लाद के
समान तुम हमारो दुःख हरचो है अथवा औरजे नामहैं इंद्रादिक तिनको परिहरि
कहे छोडिकै नरहरि कहे नृसिंह यह जो नाम है ताके सम ठाये हौ अर्थ इन्द्रादि-
कनकी समता करिवेलायक तुम नहीं हो विर्कमादि करिकै तुम नृसिंहके समान
हो मेरे बाण को जो रोष क्रोध है ताके समहो अर्थ जैसे हमारे बाणको क्रोध
निष्फल नहीं होत तैसे तुम निष्फल नहीं होते जो काज करिवो चाहौ सो करि