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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 269 में से

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पृष्ठ 152

( १४६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
तछंद ॥ जटीअग्निज्यालाअटासेतहैंज्यों। शरत्कालकेमेघसं-
ध्यासमैज्यों ॥ लगीज्वालधूमावलीनीलराजैं। मनोस्वर्णकी
किंकिणीनागलाजैं ॥ ७॥ लसैपीतक्षत्रीमठीज्वालमानौ। ढके
ओढनीलंकबक्षोजजानौ ॥ जरेजूहनारीचढ़ीचित्रसारी। मनो
चेटकामेंसतीसत्यधारी ॥८॥ कहूँ रैनिचारीगहेज्योतिगाढे।
मनोईशरोषाग्निमेंकामडाढे ॥ कहूंकामिनीज्वालमालानिभौरैं।
तजैंलालसारीअलंकारतोरैं ॥ ९ ॥
टी०-तूलरुई बाससी वस्त्र ॥ ५ ॥ झँझरीके जे झरोखा कहे छिद्र हैं तिनमें
भ्राजहीं कहे शोभित हैं जैसे छुद्रप्राणी जाके पास रहत है ताको कछू विपत्ति-
परै तो सहाय नहीं करत ताको छोडिकै भागत है लजात नहीं है तैसे अग्निदाह-
की जो विपत्तिहै तामें वारणादि सब भागत भये ॥ ६ ॥ नाग कहे हाथी ॥७॥
वक्षोज कुचसम पीत क्षत्रिय हैं ओढनी सम अग्निज्वाल है ॥ ८ ॥ भोरे कहे
भ्रमसों अलंकार स्वर्ण भूषण ॥ ९ ॥
मू०-कहूंभौनरातेरचेधूमछाहीं। शशीसूरमानोंलसैंमेघमा-
हीं। जरैअस्त्रशालाबलीगंधमाला ॥ मिलैअद्रिमानौलगीदाव
जाला ॥ १० ॥ चलीभागिचौहूंदिशाराजधानी। मिलीज्वा-
लमालाफिरैदुःखदानी॥मनोईशबानावलीलाललोलें। सबै-
दैत्यजा यानकेसंगडोलैं ॥ ११ ॥ सवैया ॥ लंकलगाइदईह-
नुमंतबिमान बचेअतिउच्चरुखीहै। छातिफटैंउचटैंबहुधामनि
रानीरटैंपानीपानीदुखीहै॥ कंचनको पबिल्योपुरपूरपयोनिधि-
मेंपसरेतिसुखीहै। गंगहजारमुखीगनिकेशोगिरामिलीमानौ-
अपारमुखीहै ॥ १२ ॥
टी०-शशि कहे श्री जो प्रताप है त्यहिसहित प्रतापरहित सूर्य्यको रंग श्वेत
है प्रतापसहित अरुण है तासों शशि कह्यो अथवा कि शशि कहे चन्द्रमा सहित
मानों सूर्य लसत हैं अर्थ चन्द्रयुक्त सूर्य होते हैं तब सूर्य्यग्रहण होत है सो