रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्दशप्रकाशः १४. ( १४५ )
काजकहासियचोरहिदेखौ कैसेबँधायोजोसुंदरितेरीछुईदगसो-
वतपात़कलेखो ॥२॥ रावण-चामरछंद ॥ क्रोरिक्रोरियातना
निफोरिफारिमारिये । काटिकोटिफारिमाँसुबांटिबांटिडारिये ॥
खालखैंचिखैंचिहाडभूनिभूजिखाइरे। पौरिटांगिरुंडमुंडलैउडम्-
द्रजाहुरे ॥३॥ बिभीषण ॥ दूतमारियेनराजराजछोड़िदीजई ।
मंत्रिमित्रपूँछिकैसौऔरदंडकीजई ॥ एकरंकमारिक्यौंबडोकलं-
कलीजई । बूंदसोकिगोकुहामहासमुद्रछीजई ॥ ४ ॥
टी०-मिलान कहे विश्राम ॥ १ ॥ हम तेरी स्त्रीको सोवत में दृग सों छुयो
अर्थ देख्यो ता पातक सों बंधिगये तू रामचन्द्रकी स्त्रीको हरि ल्यायो है
तेरी अतिदुर्गति है है इतिभावार्थः ॥ २ ॥ हनूमानके कठोरवचन सुनि कोप करि
रावण राक्षसन सों कहत हैं क्रोरि क्रोरि कहे करोरि करोरि जे यातना नाना हैं
नखदंतताजनदंडवातादि सों फोरि फोरि कहे जामें चर्म फोरि रुधिर कढि आवै
या प्रकारसों मारि डारो कहूँ ताजनानि पाठ है तौ ताजन कहे चाबुक औखालखैंचै
रोमांचितके कुठारादि सों हाडनके स्थान में काटिकै औ छुरिकादि सों फारिकै
ताको मांस बांटि बांटि डारिये कहे आपनो आपनो भाग करि लीजिये औ हाड
खैंचिके कहे निकारिकै भूनिभूनिकै खाय डारो रुण्ड रुण्डकी पढ़ते रुंडकी खाल
जानो अर्थ यह कि रुण्डकी खालमें तृणादि भरिकै सबके देखिवेके लिये पौरिमें
कहे पुरद्वारमें टांगिदेहु औ मुंडको लैके उड़ाइ कहे उड़िकै राम पास जाउ
रामपासइतिशेषः । जासों मुण्ड चीन्हि रामचन्द्र दूतको मार्यो जानि दुःखपावैं
इतिभावार्थः ॥ ३ ॥ ४ ॥
मू०-तूलतेलबोरिबोरिजोरिजोरिबाससी । लैअपाररारु-
नदूनसूतसोंकसी । पूंछपवनपूतकोसंवारिबारिदीजहीं ॥ अंग-
कोघटाइकैउडाईजातभोतहीं ॥५॥ चंचरीछंद ॥ धामधामनि
आगिकीबहुज्वालमालबिराजहीं। पवनकेझकझोरतेझँझरीझ-
रोखनभ्राजहीं ॥ बाजिबारणशारिकाशुकमोरजोरनभाजहीं ।
छुद्रज्योंबिपदाहिआवतछोडिजातनलाजहीं ॥६॥ भुजंगप्रया-