रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथमप्रकाशः १. ( ९ )
भाषाकरी प्रकाश ॥५॥ सोरहसै अठ्ठावन, कार्तिकशुदि बुध
वार ॥ रामचन्द्रकी चन्द्रिका, तब लीन्हों अवतार ॥६॥ बाल
मीकि मुनि स्वप्नमें, दीन्हों दरशन चारु ॥ केशव तिनसों यों
कह्यो, क्यों पाऊं सुखसारु ॥७॥ मुनिश्रीछंद सिद्धिऋद्धिः॥८॥
सारछंद ॥ रामनाम सत्यधाम ॥९॥ और नामकोन काम १०॥
टीका-गुणाढ्यगुणन सों पूरित औ साधु मत उत्तम मत छंद उपजाति है जा
छंदमें और और द्वै आदि छंदके चरण होइ सो छंद उपजाति कहावति है ॥४॥
॥५॥ जो मैं तिथि नहीं कह्यों सो वार पढ़ते सात वार हैं तासों सप्तमी तिथि सब
कहतेहैं परंतु ज्योतिषके ग्रंथ ग्रहलाघवादिके मतसों कल्पांत अहर्गण किये बुधवार
पंचमी और द्वादशी को आवत है सो द्वादशी भद्रा तिथी है और बुधे भद्रा
सिद्धियोग होतहै और कार्तिक शुदी एकादशीको विष्णु जागतेहैं विष्णुके जागे-
के उपरांत ग्रंथारम्भ करचो तौ चैत्रादि