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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 269 में से

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पृष्ठ 147

कहि कीरति कही जाति है राज्य श्रीहूको रामचन्द्र छांड़्यो है औ याहू को
छांड़्यो है ॥ ७९ ॥ नारायणके उरमें अंक जो गोदहै तापर श्री बसति है
अथवा अंक कहे श्रीवत्सादि चिह्न पर श्री बसति है मुद्रिकामें श्रीरामोजयति
लिख्यो है तहां रामोजयति इन अंकनके ऊपर श्रीअंक लिख्यो है शिवा पार्वती
पक्ष अष्टापद कहे पशु पशुपदते सिंह अथवा वृषभ जानौ । “चामीकरं जातरूपं
महा रजतकांचने ॥ रुक्मं कार्तस्वरं जाम्बूनदमष्टापदोऽस्त्रियामित्यमरः” मुद्रिका
पद सुवर्ण ॥ ८० ॥ अक्षर विष्णु औ अंक पिय जे रामचन्द्र हैं तिनकी प्रति-
हारिणी चोबदारिनी हैं यामें श्रीरामोजयति लिख्यो है प्रतिहार को नामोच्चार
करिवो धर्म है ॥ ८१ ॥ सखी कैसी है जगके जितने भूषण गहने हैं तिनको
जो भूषण कहे भूषिबो है ताको निधान भांडा है अर्थ अनेक प्रकार सों भूषण
पहिराइवे में चतुर है औ मुद्रिका कैसी है जग भूषण जे रामचन्द्र हैं तिनको
भूषणनको निधान कहे भांडा है अर्थ जब याको रामचन्द्र पहिरत हैं तब अनेक
भूषण पहिरे सम अपना को मानत हैं अथवा जब या मुद्रिकाको धारण करत हैं
तब अनेक भूषण पहिरे समान छबि होति है अथवा जगके जे भूषण गहने हैं
तिनको जो भूषण है सो माताको निधान कहे भांडा है काहेते मोहर है सब
राज्यको व्यवहार मोहरके अंकन सों सही होतहै ॥ ८२ ॥
मू०-दोहा ॥ सुखदा शिखदा अर्थदा, यशदा रसदातारि ।
रामचन्द्रकी मुद्रिका, किधौं परम गुरुनारि ॥ ८३ ॥ बहु बर-
णा सहजप्रिया, तमगुनहराप्रमान । जगमारग दरशावनी,
सूरुज किरण समान ॥ ८४ ॥
टी०-परम गुरुनारि कैसीहै कोमल भाषणादि करिकै सुखदा है औ शिख-
दाता है कि कुलांगननको ऐसो करिवो उचित है सो करौ औ अर्थ जो प्रयोजन
है ताकी दाता है कि स्त्रियनको पतिब्रतसों देवलोक गमन होत हैं यह पतिब्रतमें
देवलोक गमनरूप जो प्रयोजन है ताको देति है औ पतिव्रत साधब करार यश
देति है औ अनेक वचन चातुर्य्यादि रस कहे गुण देति है औ मुद्रिका दर्शन-
सों सुखदा है औ शिख दाताहै काहेते शिक्षा दियो कि धीरज धरौ औ अर्थ प्रयो-
जनकी दाता है काहेते रामचन्द्रको संदेशरूप हमारो प्रयोजन रह्यो ताको
दियो अथवा अर्थ जो ज्ञानहै ताको दाता है औ अतिमूल्याधिक्य सो जाके
पास रहै ताको यश दाता है औरस कहे प्रेमकी दाता है अर्थ रामचन्द्र प्रतिप्रेम