रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
शरासनमें । नानाद्युतिदीसतिहैघनमें । रत्नावलिसी दिवि-
द्वारभनो । वर्षागमबांधियदेवमनो ॥ १५ ॥
टी०-शिशु बालक धाइ जो माताते अन्य आपनो स्तन दूध पिआवति है औ
वृक्षविशेष सुरराइ कहे विष्णु ते वनमाल पहिरेहैं पर्वतमें वनकी माला पंगति-
समूहैति है अथ बडोवनहै बहुशीश सहस्र शिर औ बहुतशीशसो सो हैं वृक्ष
॥ ९ ॥ दिनमें द्युतिहीन चंद्रमाको देखि रामचंद्र लक्ष्मण सों कहतहैं मित्र ।
सूर्य अथवा मित्र लक्ष्मण को संबोधन है ॥ १० ॥ ११ ॥ एकादश छंदन् मों
जैसो वर्णन करयो है ऐसी बर्षाऋतु आई देखिकै रामचंद्र कलहंस कलानिधि
खंजन कंज याते इसयें छंद में जे वचन हैं ते कहत भये इति शेषः ॥ १२ ॥
तूर नगारे तार उच्चस्वर ॥ १३ ॥ १४ ॥ दिवि द्वार कहे आकाशके द्वारमें रत्ना-
वलि पढ़ते रतननके वन्दनवार जानौ बडे की अवाईमें बंदनवार बांधिबेकी रीति
प्रसिद्ध है ॥ १५ ॥
मू०-तारकछंद ॥ घनघोरघनेदशहूं दिशिछाये । मघवाज-
नुसूरजैपैचढिआये ॥ अपराधबिनाक्षितिकेतनताये । तिनपी-
डनपीडितहैउठिधाये ॥ १६ ॥
टी०-तीनि छंद को अन्वय एक है ग्रीष्म ऋतुमें अति तेजसों सूर्य क्षिति
पृथ्वीके तनताये तप्त करचो है जो कोऊ काहूको बिन दोष दुःख देई ताको दंड
करिबो राजन को उचित है इंद्रदेवन के राजा हैं तासों सूर्यको उचित दीर्घ
दंड कियो जासों ऐसो अबना करै उत्प्रेक्षा करि यह राजनीति प्रगट देखायो
अथवा पृथ्वीको अशरण जानिकै अशरणको सहाय करिबो बड़ेनको उचित है
तासों अथवा पृथ्वीको स्त्री जानिकै स्त्री की रक्षा करिबो बडेन को उचित है तासों
दुंदुभि कहे जे गजादि वाहन पर चमूके आगे नगारे बाजत हैं निर्घात कहे
जाको वज्र शब्द सब कहत हैं सो नहीं है सबै कहे जे ते निर्घात होत हैं तेते
पवि कहे वज्र के पात गिरिवो बखानो कहे कहत हैं अर्थ जै बार निर्घात होत
है सो निर्घात नहीं है बार बार इंद्र सूर्यको वज्र चलावत हैं ताहीको शब्द
होत है सम कहे बराबरी अर्थ जैसे अत्रिकी स्त्रीके उरमें देख्यो
तैसे याके उरमें देख्यो है गोर मदाइनी कहे इंद्र धनुष नहीं है प्रत्यक्ष धनुष है
गोर मदाइनि हेंद्र धनुष को नाम पश्चिममों प्रसिद्ध है औ बर्षना तुसारहूसों
प्रगट होत है कहूँगोर सदायिन नाहीं पाठ है तौ गो जे किरणें हैं ते रसद् कहे